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दमोह छात्र मौत मामला: न्याय के लिए भटके परिजन, कमिश्नर से लगाई गुहार

Family members of student Kavya Namdeo submitting memorandum to Sagar Commissioner

दमोह– जिले के तेंदूखेड़ा स्थित एक निजी स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र की संदिग्ध मौत का मामला अब गरमाता जा रहा है। घटना के तीन महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज पीड़ित परिवार ने सोमवार को सागर संभाग के कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि स्कूल की शिक्षिका की बेरहमी से की गई पिटाई के कारण ही मासूम छात्र की जान गई है। उन्होंने दोषी शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

होमवर्क न करने पर पिटाई, ढाई महीने कोमा में रहा 9 साल का काव्य

मृतक छात्र की पहचान 9 वर्षीय काव्य नामदेव के रूप में हुई है, जो तेंदूखेड़ा के आईआईएस (IS) पब्लिक स्कूल में तीसरी कक्षा का छात्र था। छात्र के मामा हेमंत नामदेव ने बताया कि बीते 19 फरवरी को होमवर्क पूरा न होने की बात पर स्कूल की शिक्षिका देवेंद्री ठाकुर ने मासूम काव्य के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की थी। इस पिटाई के बाद बच्चे की तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि वह अचानक कोमा में चला गया। लगभग ढाई महीने तक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे काव्य का इलाज पहले जबलपुर और फिर भोपाल के एम्स (AIIMS) अस्पताल में कराया गया, लेकिन आखिरकार बीती 15 मई को भोपाल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मौत के बाद परिजन शव को लेकर सीधे दमोह एसपी कार्यालय पहुंचे थे, जहां से उन्हें पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था।

प्रबंधन के राजनीतिक रसूख और बिना डिग्री वाले शिक्षकों पर आरोप

परिजनों का आरोप है कि एसपी के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन तो किया गया था, लेकिन घटना को इतना समय बीत जाने के बाद भी न तो आरोपी शिक्षिका और न ही स्कूल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई हुई। परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल संचालक के ऊंचे राजनीतिक रसूख के चलते दमोह कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को आवेदन देने के बाद भी स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही परिजनों ने स्कूल की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि इस निजी स्कूल में कई ऐसे शिक्षक हैं जो बिना डी.एड. (D.Ed) या बी.एड. (B.Ed) की अनिवार्य डिग्री के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कमिश्नर को सौंपे ज्ञापन में स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द करने और दोषी शिक्षिका पर गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज करने की मांग की है, जिसके विरोध में और न्याय के लिए अब परिजनों द्वारा क्षेत्र में रैली भी निकाली जा रही है।

पीएम रिपोर्ट पर बढ़ा सस्पेंस, थाना प्रभारी के बयान से आक्रोश

इस पूरे संवेदनशील मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश व्याप्त है। तेंदूखेड़ा थाना प्रभारी रविंद्र बागरी ने मीडिया को बताया कि छात्र की पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट आ चुकी है और इसे जांच कर रही एसआईटी (SIT) को सौंप दिया गया है, हालांकि थाना प्रभारी ने यह भी कहा कि उन्हें खुद नहीं मालूम कि पीएम रिपोर्ट में बच्चे की मौत का असल कारण क्या बताया गया है। थाना प्रभारी के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान के बाद परिजनों का गुस्सा और भड़क गया है। परिजनों का कहना है कि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई थी, तो नियमानुसार सबसे पहले इसकी जानकारी पीड़ित माता-पिता को दी जानी चाहिए थी, लेकिन पुलिस ने गुपचुप तरीके से इस रिपोर्ट को अन्य अधिकारियों को भेज दिया और आज 15 दिन बाद भी माता-पिता इस इंतजार में भटक रहे हैं कि उनके लाडले की मौत की असली वजह क्या थी।

बीमारी से मौत का दावा: स्कूल प्रबंधक

दूसरी ओर, इन तमाम गंभीर आरोपों पर आईएस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक विक्रम सिंह ने अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि शासन के सभी नियमों के तहत स्कूल का संचालन हो रहा है और वहां कार्यरत सभी शिक्षक पूरी तरह योग्यताधारी हैं। प्रबंधक का दावा है कि बच्चे की दुखद मौत स्कूल की पिटाई से नहीं बल्कि किसी पुरानी बीमारी के चलते हुई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद चाहते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।