IAS प्रताप नारायण यादव: दमोह के 'जनता वाले कलेक्टर' जिनकी सादगी और सख्ती दोनों हैं मिसाल; खुद की जासूसी का ऐसे किया था भंडाफोड़
दमोह। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—प्रताप नारायण यादव। 10 अप्रैल 2026 को दमोह कलेक्टर की कमान संभालने के बाद से उन्होंने अपनी कार्यशैली से न केवल आम जनता का दिल जीता है, बल्कि भ्रष्ट और लापरवाह सिस्टम के बीच खौफ भी पैदा कर दिया है。 सोशल मीडिया पर उनके वीडियो किसी फिल्मी नायक की तरह वायरल हो रहे हैं, जहाँ वे कभी बुजुर्गों के पैर छूते नजर आते हैं, तो कभी दफ्तर में छिपे 'भेदियों' का शिकार करते हैं।
बुजुर्गों के प्रति सम्मान और जमीन से जुड़ी कार्यशैली
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की सबसे बड़ी पहचान उनकी संवेदनशीलता है。 जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के दौरों के दौरान वे किसी बड़े अफसर की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार करते हैं।
- आशीर्वाद की परंपरा: कई मौकों पर उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में बुजुर्ग महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेते देखा गया है。
- जन-संवाद का अनोखा तरीका: वे अक्सर फर्श पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हैं और चौपालों में युवाओं के साथ भजन गाते भी नजर आते हैं。 उनके इसी अंदाज के कारण लोग उन्हें “संवेदनशील कलेक्टर” और “जनता का कलेक्टर” कहकर पुकार रहे हैं。
जब खुद के ऑफिस में पकड़ा 'जासूसी नेटवर्क'
प्रताप नारायण यादव जितने सौम्य जनता के लिए हैं, उतने ही सख्त वे अनुशासनहीनता के खिलाफ हैं。 कार्यभार संभालते ही उन्होंने अपने ही कार्यालय के भीतर चल रहे एक 'जासूसी नेटवर्क' का पर्दाफाश कर सभी को चौंका दिया。
- रियल टाइम लीक हो रही थी जानकारी: उन्हें संदेह हुआ कि उनके चैंबर में होने वाली गोपनीय बैठकों की बातें पीए (PA) कक्ष में सुनी जा रही हैं。
- खुद तैयार किया 'ट्रैप': सच जानने के लिए उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने अपने चैंबर में मोबाइल पर न्यूज चलाई और दूसरे कमरे में जाकर देखा कि वहां आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी。 इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और गोपनीय जानकारी लीक करने वालों पर गाज गिरी。
MPPCS से IAS तक का सफर
मूल रूप से मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के रहने वाले प्रताप नारायण यादव (जन्म: 24 जनवरी 1973) मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारी रहे हैं。 वर्ष 2016 में वे प्रमोट होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी बने。 दमोह कलेक्टर बनने से पहले वे राज्य शासन में डिप्टी सेक्रेटरी और अंडर सेक्रेटरी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं。

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