ADVERTISEMENT

दमोह: बांदकपुर कॉरिडोर के रास्ते का 'कांटा' बना अतिक्रमण, सर्व हिंदू समाज ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

Hindu Samaj members giving a stern warning and memorandum against encroachment in Bandakpur corridor in damoh today

दमोह, ब्यूरो रिपोर्ट: दमोह जिले में स्थित बुंदेलखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल जागेश्वर धाम बांदकपुर का बहुप्रतीक्षित विकास कार्य अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले भव्य बांदकपुर कॉरिडोर के मुख्य द्वार पर जमे अतिक्रमण को हटाने की मांग अब तेज हो गई है। सर्व हिंदू समाज ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए दमोह कलेक्टर को राज्य के मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। समाज ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कॉरिडोर के रास्ते से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो दमोह में एक उग्र और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

13वें ज्योतिर्लिंग का विकास और 10 करोड़ का पहला चरण

जागेश्वर धाम बांदकपुर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां विराजमान भगवान शिव को 13वें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। इस धाम को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर भव्यता प्रदान करने के लिए 100 करोड़ रुपए के मेगा कॉरिडोर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है।

वर्तमान में लगभग 10 करोड़ रुपए की लागत से इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का कार्य प्रगति पर है। लेकिन मुख्य द्वार के सामने का अतिक्रमण इस काम में बड़ी बाधा बन रहा है। हिंदू समाज के प्रतिनिधि पंडित चंद्र गोपाल पौराणिक ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले वहां का अतिक्रमण हटाना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होती है। सभी शिव भक्तों की यही मांग है कि बांदकपुर के मुख्य द्वार को तुरंत अतिक्रमण मुक्त किया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक कॉरिडोर बिना किसी रुकावट के आकार ले सके।

व्यापारियों का दावा- 'यह अतिक्रमण नहीं, रहवासी क्षेत्र है'

विकास और अतिक्रमण के इस टकराव का एक दूसरा पहलू भी है। कुछ दिनों पहले बांदकपुर के स्थानीय व्यापारियों और ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी दमोह कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखा था।

स्थानीय व्यापारियों का दावा है कि जिस हिस्से को अतिक्रमण बताकर निशाना बनाया जा रहा है, वह वास्तव में एक वैध रहवासी क्षेत्र है। रहवासियों का कहना है कि उनके पास इस जमीन के बरसों पुराने पक्के दस्तावेज मौजूद हैं। उनका तर्क है कि पूर्व में तहसीलदार द्वारा की गई राजस्व जांच में भी इस क्षेत्र को रहवासी घोषित किया गया था।

अब प्रशासन के सामने एक बड़ी धर्मसंकट की स्थिति है। एक तरफ भव्य कॉरिडोर के निर्माण को समय पर पूरा करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ व्यापारियों के दस्तावेजों और दावों की सच्चाई परखना। ऐसे में हिंदू समाज की 'उग्र आंदोलन' की चेतावनी ने प्रशासन की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।