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950 करोड़ का जैकपॉट! मध्य प्रदेश का सिंगरौली अब सच में बनेगा 'सिंगापुर', मोहन सरकार ने बदल दिए नियम

Singrauli to get 950 crore DMF fund for development under Mohan Yadav government - damoh today news

सिंगरौली: मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला... जिसे पूरे प्रदेश की 'ऊर्जाधानी' कहा जाता है. यहां की खदानों से निकला कोयला और ताप बिजलीघरों की बिजली पूरे देश को रोशन करती है. लेकिन विडंबना देखिए कि जो शहर सबको रोशनी देता रहा, वह खुद स्वास्थ्य, शिक्षा, अच्छी सड़कों और बुनियादी ढांचे जैसी बेसिक सुविधाओं के लिए तरसता रहा. लेकिन अब सिंगरौली वासियों के लिए एक बेहद भौकाली और तगड़ी खुशखबरी आ गई है!

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया दौरे के बाद सिंगरौली के दिन फिरने वाले हैं. बरसों पहले पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सिंगरौली को 'सिंगापुर' बनाने का जो सपना दिखाया था, अब वह सचमुच जमीन पर उतरने वाला है. इसका रास्ता साफ किया है 950 करोड़ रुपये के डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) ने, जिसके नियमों को सरकार ने पूरी तरह पलट दिया है.


पहले मिलते थे सिर्फ 'चिल्लर', अब पूरा पैसा होगा सिंगरौली का!

इस पूरे खेल और बड़े बदलाव को एकदम आसान भाषा में समझिए कि आखिर सिंगरौली के हाथ क्या जैकपॉट लगा है:

  • अब पूरा पैसा सिंगरौली का: नए DMF नियमों के तहत, अब जिले से मिलने वाला पूरा का पूरा 950 करोड़ रुपये का फंड सिर्फ और सिर्फ सिंगरौली के विकास पर खर्च होगा. इसे किसी दूसरे जिले में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा.
  • पहले का गणित: इससे पहले सिंगरौली से मिलने वाले 950 करोड़ के भारी-भरकम फंड में से जिले को विकास के लिए बमुश्किल 50 करोड़ रुपये ही नसीब होते थे, बाकी का मोटा पैसा प्रदेश के दूसरे जिलों के खातों में चला जाता था.
  • पार्ट A और पार्ट B का झंझट खत्म: पहले फंड को दो हिस्सों (Part-A और Part-B) में बांटा जाता था, जिससे सरकारी फाइलों को क्लियर होने और बजट पास होने में अड़ंगे लगते थे. मोहन सरकार ने इस वर्गीकरण को पूरी तरह से डिलीट कर दिया है.
  • चमकेगा बुनियादी ढांचा: इस भारी-भरकम बजट से शहर में मास्टर प्लान के तहत बड़े बाईपास, फोरलेन सड़कें, शानदार सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और वर्ल्ड क्लास स्कूल बनाए जाएंगे.

छप्परफाड़ फंड: आखिर सिंगरौली के पास इतना पैसा आता कहाँ से है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) सिंगरौली से ही जनरेट होता है. यहाँ मौजूद विशाल कोयला खदानों और पावर प्लांट्स की वजह से कंपनियाँ सरकार को भारी रॉयल्टी देती हैं.

इलाके से आने वाले इस छप्परफाड़ फंड का पूरा गणित आप इस तालिका से समझ सकते हैं:

कंपनी का नाम DMF फंड की सालाना राशि
एनसीएल (NCL) 750 करोड़ रुपये
रिलायंस (Reliance) 75 करोड़ रुपये
एपीएमडीसी (APMDC) 25 करोड़ रुपये
टीएचडीसी (THDC) 9 करोड़ रुपये
जेपी पावर (JP Power) 7 करोड़ रुपये
कुल बजट 950 करोड़ रुपये

सीएम मोहन यादव का कड़क निर्देश और 'कलेक्टर' का नया प्लान

बीते दिनों जब सीएम डॉ. मोहन यादव सिंगरौली पहुंचे, तो उन्होंने मंच से खुलेआम कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में सिंगरौली का तगड़ा योगदान है, इसलिए इसे प्रदेश के सबसे 'बेस्ट शहरों' में गिना जाएगा. उन्होंने तुरंत एनसीएल (NCL), एनटीपीसी (NTPC) और तमाम प्राइवेट कंपनियों के अफसरों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की और विकास का नया खाका खींचने का निर्देश दे दिया.

सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने बताया: "DMF फंड के पुराने नियमों को अब पूरी तरह बदल दिया गया है. पार्ट-A और पार्ट-B का जो झंझट था, वो खत्म हो चुका है. अब हम 3 से 5 साल की 'परफेक्टिव प्लानिंग' कर रहे हैं, जिसके तहत शहर के चौतरफा विकास का एक नया मास्टर प्लान तैयार किया जा चुका है."

तो कुल जमा बात ये है कि जिस सिंगरौली के लोग सालों से धूल और धुएं के बीच बेहतर जिंदगी की आस लगाए बैठे थे, उनके लिए 950 करोड़ रुपये का यह फंड किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब बस इंतजार इस बात का है कि कागजों पर बना यह 'सिंगापुर' असल में जमीन पर कितनी जल्दी उतरता है!