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मीनाक्षी नटराजन का पर्चा कटने पर दमोह में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, BJP पर लगाया 'सीटें चुराने' का आरोप!

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दमोह। मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव की तपिश अब सीधे दमोह जिले की सड़कों पर महसूस होने लगी है। कांग्रेस की दिग्गज नेता और राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र भोपाल में क्या खारिज हुआ, दमोह के कांग्रेसी नेताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के कड़क निर्देश मिलते ही बुधवार दोपहर दमोह जिला मुख्यालय के बैंक चौराहे से लेकर हटा विधानसभा मुख्यालय तक कांग्रेसियों ने जोरदार हल्ला बोल दिया। हटा में तो ब्लॉक और नगर कांग्रेस कमेटी के बैनर तले सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक बकायदा सामूहिक उपवास रखकर इस फैसले का कड़ा विरोध किया गया।

कांग्रेस का साफ आरोप है कि बीजेपी अब वोट नहीं, बल्कि सीधे-सीधे 'सीटें चुराने' का धंधा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों ने दमोह के सियासी पारे को और ज्यादा गरमा दिया है।

जीतू पटवारी का कड़क ऐलान- 'सत्ता के लिए भाजपा क्या हाल कर रही है'

दमोह की सड़कों पर उतरे कांग्रेसियों में उस वक्त और जोश भर गया जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले को लेकर सीधा हमला बोला। उन्होंने साफ कर दिया कि कांग्रेस अब चुप नहीं बैठेगी।

जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया और अपने आधिकारिक बयान में कहा:

"हम मीनाक्षी नटराजन जी के फॉर्म निरस्त होने के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग जा रहे हैं, और क़ानूनी लड़ाई लड़ने न्यायालय भी जाएँगे। देशवासियो, देखो और समझो, सत्ता के लिए भाजपा हमारे देश का क्या हाल कर रही है।"


दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान- "यह रिटर्निंग अधिकारी का स्पष्ट पक्षपात है"

दमोह से लेकर भोपाल तक मचे इस हंगामे के बीच कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर रिटर्निंग ऑफिसर की बेईमानी करार दिया है।

दिग्विजय सिंह ने अपने आधिकारिक बयान में कड़क लहजे में कहा:

"कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार सुश्री मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निरस्त करना निश्चित रूप से असंवैधानिक और अवैध निर्णय है, जो रिटर्निंग अधिकारी के स्पष्ट पक्षपात को दर्शाता है। इस मामले में कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।"

सिंह के इस बयान के बाद साफ हो गया है कि कांग्रेस इस मामले को सिर्फ सड़क पर (दमोह जैसे शहरों में) ही नहीं लड़ेगी, बल्कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी पूरी तैयारी कर ली गई है।

दमोह में हुए इस सियासी बवाल की बड़ी बातें:

  • दमोह और हटा में प्रदर्शन: भोपाल के फैसले के खिलाफ दमोह के बैंक चौराहे और हटा में कांग्रेसियों ने सड़क पर उतरकर मोर्चा संभाला।
  • लोकतंत्र की हत्या का आरोप: स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किए जाने को सरासर नाइंसाफी और लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
  • 1.5 साल पुराने नोटिस का पेंच: दमोह के कांग्रेस नेताओं का दावा है कि महज एक पुराने आईटी नोटिस को आधार बनाकर राहुल गांधी की पसंदीदा उम्मीदवार का फॉर्म रिजेक्ट किया गया है।
  • बीजेपी की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ: इस राजनैतिक उलटफेर के बाद बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की निर्विरोध जीत लगभग पक्की हो गई है, जिससे मुकाबला एकतरफा हो गया है।

दमोह के कांग्रेस नेता प्रदीप खटीक बोले- "यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है"

हटा में चल रहे सामूहिक उपवास के दौरान दमोह के स्थानीय कांग्रेस नेता प्रदीप खटीक ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे देश और आम जनता के लिए एक बड़ा झटका बताया। प्रदीप खटीक ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म में कोई कानूनी गड़बड़ी नहीं थी, क्योंकि उनके खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं थी।

दमोह के कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी को घेरते हुए कहा:

"अब तक तो बीजेपी चुनाव में वोट चोरी करने के लिए बदनाम थी, लेकिन अब वे सीधे सीटें चुराने का काम कर रहे हैं। नामांकन पत्र को जानबूझकर निरस्त कराया गया है ताकि बीजेपी उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले के राज्यसभा पहुंच सके। लेकिन बीजेपी के इस अन्याय और अत्याचार के खिलाफ हम दमोह के कांग्रेसी मरते दम तक लड़ते रहेंगे।"

इस प्रदर्शन में हटा ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष योगेश सराफ, शहर कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश पटेरिया, नपा उपाध्यक्ष प्रशांत पाठक और रामनाथ राय सहित भारी संख्या में दमोह के स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने दोपहर 2 बजे राष्ट्रगान गाकर अपना शांतिपूर्ण उपवास खत्म किया।

दमोह के इस बवाल पर भोपाल से आए दिग्गजों के तीखे बयान

भले ही दमोह में कांग्रेस सड़कों पर उतरकर बीजेपी को कोस रही हो, लेकिन भोपाल में बैठे सूबे के मुखिया और बीजेपी दिग्गजों ने इस पर अलग ही कहानी बयां की है।

1. मुख्यमंत्री मोहन यादव का तंज- "सरपंच का फॉर्म भरने वाला भी सतर्क रहता है" दमोह में मचे हंगामे के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस लीडरशिप पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हार के डर से जानबूझकर अपने प्रत्याशी के फॉर्म में गलती की है। सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा, "आज के जमाने में जब कोई आम आदमी पंच या सरपंच का फॉर्म भी भरता है, तो वो अपनी सारी जानकारी विस्तार से देता है। लेकिन कांग्रेस के इतने बड़े रसूखदार नेता, जो कई बार चुनाव लड़ चुके हैं, वो अपने फॉर्म के बारे में कुछ नहीं बता पाए। इन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने अंदर झांकना चाहिए।"

2. कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा दावा- "दस्तावेज हमें कांग्रेसियों ने ही लाकर दिए" इस पूरे ड्रामे में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा कर दिया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना कोर्ट के जो दस्तावेज बीजेपी को मिले, वो खुद कांग्रेस के ही अंदरूनी गुट के लोगों ने लीक किए थे। विजयवर्गीय ने कहा, "तेलंगाना में खुद कांग्रेस की सरकार है, हमें वहां के मामलों का क्या पता? ये कांग्रेस की अपनी आपसी गुटबाजी है, जिसने अपनी ही उम्मीदवार की पीठ में छुरा घोंप दिया।"

दमोह में कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में है और इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी चल रही है। अब देखना यह होगा कि दमोह से उठी विरोध की यह चिंगारी मध्य प्रदेश की सियासत में आगे क्या रंग लाती है!