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सीतानगर मंदिर से 400 साल पुरानी राम-जानकी की मूर्ति गायब! दो महंतों में ठनी, SP ऑफिस पहुंचे महामंडलेश्वर

Controversy over missing 400 years old Ram Janki idol from Seetanagar Badi Shala in Damoh - damoh today news

दमोह। जिले के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र सीतानगर की बड़ीशाला से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके के धार्मिक और सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। बड़ीशाला के गर्भगृह से भगवान राम और माता जानकी की करीब 400 साल पुरानी अष्टधातु की बहुमूल्य प्रतिमाएं अचानक गायब हो गई हैं।

इस घटना के बाद गढ़ाकोटा जगदीश मंदिर के महामंडलेश्वर महंत हरिदास और सीतानगर शाला के वर्तमान महंत संतोष दास आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां महामंडलेश्वर ने वर्तमान महंत पर मूर्ति चोरी और गायब कराने का संगीन आरोप लगाते हुए सीधे दमोह एसपी (SP) की चौखट खटखटाई है, वहीं दूसरी तरफ महंत संतोष दास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'अमानत की वापसी' और कोर्ट केस की रंजिश करार दिया है।

Seetanagar Badi Shala in Damoh

इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद की बड़ी बातें:

  • 400 साल पुरानी अष्टधातु की मूर्तियां गायब: एकादशी के मौके पर जब महामंडलेश्वर दर्शन करने पहुंचे, तो गर्भगृह से भगवान राम और सीता जी की प्रतिमाएं नदारद थीं।
  • चोरी या अमानत की वापसी? महामंडलेश्वर का आरोप है कि मूर्तियां चोरी छिपे बेच दी गईं या गायब की गईं, जबकि वर्तमान महंत का दावा है कि जिसकी अमानत थी, उसे ससम्मान लौटा दी गई है।
  • ट्रस्ट के पैसों और जमीन का खेल: महामंडलेश्वर ने मंदिर के ट्रस्टियों पर लाखों की हेरफेर का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी तरफ से उन पर जमीन हड़पने के लिए दबाव बनाने का पलटवार हुआ है।
  • हाईकोर्ट में चल रहा है केस: मंदिर की गद्दी और उत्तराधिकार को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से ही उच्च न्यायालय (High Court) में कानूनी लड़ाई जारी है।

Ram Janki idol from Seetanagar Badi Shala in Damoh - damoh today news

महामंडलेश्वर हरिदास पहुंचे SP दफ्तर, बोले- "मंदिरों से मूर्तियां गायब होंगी तो कैसे चलेगा?"

गुरुवार दोपहर गढ़ाकोटा जगदीश मंदिर के महामंडलेश्वर महंत हरिदास अचानक दमोह के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचे और एक कड़क शिकायती आवेदन सौंपा। उन्होंने बताया कि गुरुवार को एकादशी के पावन अवसर पर वे सीतानगर की शाला में भगवान के दर्शन करने गए थे। लेकिन वहां गर्भगृह का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए, क्योंकि भगवान राम और माता जानकी की प्राचीन प्रतिमाएं वहां थीं ही नहीं।

महंत हरिदास ने मीडिया और पुलिस से बात करते हुए कहा:

"पूछताछ में पता चला है कि मंदिर के महंत संतोष दास ने बिना किसी को बताए ये बेशकीमती मूर्तियां किसी अनजान व्यक्ति को सौंप दी हैं। अगर हमारे ऐतिहासिक मंदिरों से इस तरह 400 साल पुरानी अष्टधातु की मूर्तियां गायब होने लगेंगी, तो हमारी सनातनी धरोहर को बचाना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, मंदिर के ट्रस्टी यहां के पैसों और अगाध संपत्ति का भारी हेरफेर कर रहे हैं।"

वर्तमान महंत संतोष दास का करारा पलटवार- "चोरी नहीं हुई, जिसकी अमानत थी उसे लौटाया"

महामंडलेश्वर के इन तीखे आरोपों पर सीतानगर शाला के महंत संतोष दास भी तुरंत मैदान में उतर आए और उन्होंने इन आरोपों को सरासर झूठा और मनगढ़ंत बता दिया।

महंत संतोष दास ने पूरी कहानी बयां करते हुए कहा:

"मूर्तियां चोरी नहीं हुई हैं। सालों पहले कुटरी पिपरिया के मिश्रा परिवार ने मंदिर को ढाई एकड़ जमीन दान की थी और साथ ही ये मूर्तियां मंदिर में रखवाई थीं। हमारे गुरु ब्रह्मलीन संत हरिप्रपन्न दास महाराज के सामने ही मिश्रा परिवार ने कहा था कि जब भी उन्हें जरूरत होगी, वे मूर्तियां ले जाएंगे। करीब 20 दिन पहले मिश्रा परिवार के लोग झिरिया के महंत, उनके सेवक और शुभम पुजारी की मौजूदगी में आए थे और सबके सामने अपनी अमानत वापस ले गए।"

"फर्जी वसीयत के दम पर उत्तराधिकारी बनने की कोशिश"

महंत संतोष दास ने गढ़ाकोटा के महंत पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे खुद एक फर्जी वसीयत के जरिए सीतानगर शाला का उत्तराधिकारी बनने की फिराक में हैं और यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में पेंडिंग है। उन्होंने आरोप लगाया कि महामंडलेश्वर के साथ मिलकर कमलेश उपाध्याय नाम का एक व्यक्ति पिछले ढाई साल से उन पर मंदिर की कीमती जमीन छोड़ने का दबाव बना रहा है। संतोष दास ने साफ कहा कि वे पिछले 21 सालों से अपने गुरु की सेवा कर रहे थे और गुरु के देवलोक गमन के बाद ही उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। कोई भी व्यक्ति मंदिर आकर सच देख सकता है, ये सारे आरोप सिर्फ गद्दी की लालच और दुर्भावना के चलते लगाए जा रहे हैं।

अब गेंद दमोह पुलिस के पाले में है। देखना यह होगा कि 400 साल पुरानी इन ऐतिहासिक प्रतिमाओं का असली सच पुलिस जांच में क्या निकलकर सामने आता है!