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दमोह कलेक्टर का कड़क एक्शन! CM हेल्पलाइन न खोलने पर बैंकर्स को नोटिस, PNB की थपथपाई पीठ

Damoh Collector Bank Meeting CM Helpline - Damoh Today News

दमोह। दमोह जिले में अब काम में ढिलाई और 'कल आना' वाला सरकारी रवैया बिल्कुल नहीं चलेगा! दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव फुल एक्शन मोड में आ गए हैं। गुरुवार को उन्होंने जिले के तमाम बैंकर्स और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की क्लास लगा दी। मुद्दा था—बेरोजगार युवाओं को मिलने वाला लोन और सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) की शिकायतें।

कलेक्टर ने दो-टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि बैंकर्स मार्च-क्लोजिंग के दबाव का रोना रोने के बजाय हर तीन महीने (तिमाही) का टारगेट सेट करें और युवाओं को समय पर लोन दें। सबसे बड़ा धमाका तो तब हुआ, जब पता चला कि कुछ बैंकों ने तो सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें खोलकर तक नहीं देखी हैं!

कलेक्टर की मीटिंग की बड़ी बातें एक नज़र में:

  • CM हेल्पलाइन की अनदेखी पर नोटिस: 24 शिकायतें ऐसी मिलीं जिन्हें बैंक अधिकारियों ने खोला तक नहीं था। कलेक्टर ने तुरंत जवाब-तलब करते हुए नोटिस थमा दिया है।
  • तिमाही लक्ष्य पर जोर: बैंकर्स को निर्देश दिया गया है कि वे साल के अंत का इंतजार न करें, बल्कि तिमाही (Quarterly) आधार पर लोन पास करें।
  • स्वरोजगार पर फोकस: पीएम जनधन, मुद्रा योजना, उद्यम क्रांति और बिरसा मुंडा स्वरोजगार जैसी योजनाओं के तहत युवाओं को भटकाने के बजाय जल्द लोन देने के निर्देश दिए गए।
  • PNB की तारीफ: मीटिंग में सिर्फ डांट नहीं पड़ी, बल्कि अच्छा काम करने वाले पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और अन्य बैंकों की जमकर तारीफ भी हुई।

'CM हेल्पलाइन से मजाक बर्दाश्त नहीं'

बैठक के दौरान जब सीएम हेल्पलाइन पोर्टल की समीक्षा शुरू हुई, तो कई बैंकों की पोल खुल गई। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने पाया कि बैंकों से जुड़े 24 आवेदन पेंडिंग पड़े थे और हद तो तब हो गई जब देखा कि बैंक अधिकारियों ने इन शिकायतों को पोर्टल पर ओपन तक नहीं किया था।

इस घोर लापरवाही पर कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने तुरंत संबंधित बैंकर्स को कड़क नोटिस जारी कर दिया और साफ चेतावनी दी कि जनता की समस्याओं का समय पर समाधान होना ही चाहिए। भविष्य में अगर सीएम हेल्पलाइन में इस तरह की लापरवाही सामने आई, तो इससे भी तगड़ा एक्शन लिया जाएगा।

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'मार्च का प्रेशर मत पालो, तिमाही में बांटो टारगेट'

कलेक्टर ने बैंकर्स को बड़ी काम की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अक्सर बैंक साल के अंत (मार्च क्लोजिंग) में अचानक से लोन बांटने की हड़बड़ी करते हैं, जिससे प्रेशर बनता है और सही लोगों को फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए बेहतर है कि अपने सालाना टारगेट को हर तिमाही (तीन महीने) के हिसाब से बांटें और उसी अनुपात में ऋण स्वीकृत (Loan Approve) करें।

शासन की मंशा एकदम साफ है—जिले के बेरोजगार युवाओं और अपना धंधा-पानी शुरू करने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं (जैसे- संत रविदास, डॉ. अंबेडकर, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना) का पैसा बिना किसी झंझट के समय पर मिले, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

इन बैंकों ने लूटी महफिल!

ऐसा नहीं है कि बैठक में सिर्फ सख्ती ही हुई। जिन बैंकों ने काम अच्छा किया, कलेक्टर ने खुले दिल से उनकी तारीफ भी की। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सहित कुछ अन्य बैंकों ने अपने टारगेट पूरे करने में झंडे गाड़ दिए हैं।

खासकर 'अंत्यव्यवसायी योजना' के तहत इन बैंकों ने 100 प्रतिशत से भी ज्यादा का टारगेट अचीव किया है। कलेक्टर ने इन अधिकारियों की पीठ थपथपाई और दूसरे बैंकों को भी नसीहत दी कि वे भी PNB की तरह काम का तरीका सुधारें ताकि दमोह जिले के ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्वरोजगार का फायदा मिल सके।