दमोह के सीतानगर में 'अधिक मास' पर श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
रिपोर्ट- आशीष विश्वकर्मा, सीतानगर: दमोह जिले के सीतानगर में इन दिनों धर्म और अध्यात्म की अविरल गंगा बह रही है। पवित्र 'अधिक मास' के विशेष अवसर पर समस्त ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों के सामूहिक सहयोग से सीतानगर के सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय प्रांगण में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शानदार शुभारंभ किया गया है। यह धार्मिक आयोजन न केवल ग्रामीण अंचल में आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।
कथा की शुरुआत पूरे विधि-विधान और एक विशाल कलश यात्रा के साथ हुई। इस यात्रा में सीतानगर और आसपास के इलाकों से भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
आयोजन की मुख्य बातें:
- कथा स्थल: सीतानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय का प्रांगण।
- भव्य कलश यात्रा: गांव के प्राचीन खेर माता मंदिर से प्रमुख देव स्थलों तक निकाली गई विशाल कलश यात्रा।
- कथा व्यास: अयोध्या धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित रोहित बारोलिया (इच्छाधारी गुरु) के श्रीमुख से कथा का वाचन।
- सामूहिक सहयोग: यह पूरा आयोजन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे गांव के जन-सहयोग और चंदे से संपन्न हो रहा है।
खेर माता मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा
किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान की तरह इस भागवत कथा का श्रीगणेश भी मंगल कलश यात्रा से हुआ। सीतानगर के खेर माता मंदिर से जब यह यात्रा शुरू हुई, तो इसमें मातृशक्ति की भारी भागीदारी देखने को मिली। सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए थीं। वहीं, गांव के युवाओं और बच्चों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ढोल-नगाड़ों और 'जय श्री कृष्णा' के जयकारों के बीच यह यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों और दिव्य स्थलों से होते हुए कथा स्थल तक पहुंची। मार्ग में जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया गया।
'अधिक मास' का विशेष महत्व और आध्यात्मिक संदेश
कथा पंडाल में कथा व्यास पंडित रोहित बारोलिया (इच्छाधारी गुरु) ने व्यास पीठ ग्रहण की, तो पूरा वातावरण शांत और भक्तिमय हो गया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए 'अधिक मास' (पुरुषोत्तम मास) के दुर्लभ महत्व पर प्रकाश डाला।
पंडित रोहित बारोलिया ने धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए बताया:
"सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। यह पवित्र मास लगभग 3 वर्ष में केवल एक बार आता है, इसीलिए इसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि जहां भी श्रीमद् भागवत कथा का संगीतमय आयोजन होता है, वहां सभी तीर्थों, महान संतों और साक्षात 33 कोटि देवताओं का वास हो जाता है। इस मास में किया गया श्रवण और दान अनंत फलदायी होता है।"
युवाओं की भागीदारी और जन-सहयोग बना मिसाल
इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता इसकी व्यवस्था और सामूहिक भागीदारी में छिपी है। सीतानगर के युवाओं ने सोशल मीडिया और मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर इस कथा के प्रबंधन का पूरा जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया है। बैठक व्यवस्था से लेकर प्रसाद वितरण और कलश यात्रा के सुचारू संचालन तक में युवाओं की भूमिका सराहनीय है।
आगामी दिनों तक चलने वाले इस संगीतमय भागवत ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। आयोजन समिति ने दमोह और आसपास के सभी धर्मप्रेमियों से इस कथा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।


