दमोह SP का कड़क एक्शन! पथरिया जनसुनवाई में 'अवैध शराब' पर दी खुली चेतावनी, 15 दिन का अल्टीमेटम
दमोह। दमोह जिले में पुलिस महकमा अब फुल एक्शन मोड में नजर आ रहा है। मंगलवार को दमोह के पुलिस कप्तान (SP) आनंद कलादगी ने पथरिया थाने में जनता का दरबार लगाया। इस जनसुनवाई में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और करीब 70 से ज्यादा शिकायतें सीधे एसपी की टेबल तक पहुंचीं। जमीनी विवादों से लेकर अवैध शराब के गोरखधंधे तक की शिकायतों पर एसपी ने मौके पर ही अधिकारियों की क्लास लगा दी और दो टूक कह दिया— "लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी!"
इस भौकाली जनसुनवाई में एसपी के साथ पथरिया की एसडीएम निकत चौरसिया, एसडीओपी प्रिया सिंधी और पथरिया थाना प्रभारी नेहा गोस्वामी भी मौजूद रहीं। कप्तान ने साफ कर दिया है कि फाइलें अब थानों में धूल नहीं फांकेंगी, बल्कि तय समय में उनका निपटारा करना ही होगा।
जनसुनवाई की मुख्य बातें एक नज़र में:
- 70 से ज्यादा आवेदन: महज कुछ घंटों में पुलिस और प्रशासन के सामने शिकायतों का अंबार लग गया।
- जमीन और राजस्व के मुद्दे ज्यादा: सबसे ज्यादा मामले जमीनी विवादों और राजस्व (Revenue) से जुड़े पाए गए, जिन्हें तुरंत एसडीएम को सौंप दिया गया।
- अवैध शराब पर जीरो टॉलरेंस: इलाके में शराब के अवैध ठेकों को लेकर एसपी ने थाना प्रभारी को सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए।
- 15 दिन का अल्टीमेटम: सभी शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी मॉनिटरिंग होगी और 15 दिन के भीतर अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
संदिग्ध मौत और अवैध शराब पर गरमाया मुद्दा
जनसुनवाई में सब कुछ शांत नहीं था। किनद्रो गांव से आया ठाकुर परिवार सीधे एसपी के सामने पेश हुआ और अपने परिवार के एक सदस्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर न्याय की गुहार लगाई। एसपी आनंद कलादगी ने परिवार को तसल्ली देते हुए साफ किया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच में जो भी तथ्य (Facts) सामने आएंगे, उसी के आधार पर कड़क कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, भगवती मानव कल्याण संगठन के सदस्यों ने इलाके में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि इस पर तुरंत लगाम लगाई जाए। एसपी ने भी बिना देरी किए संगठन को ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
लापरवाही पर नपेंगे थानेदार, जवाबदेही होगी तय
कप्तान के तेवर एकदम सख्त थे। उन्होंने थाना प्रभारी और एसडीओपी को दो टूक हिदायत दी कि अगर इलाके से अवैध शराब बिकने की शिकायत मिली, तो तुरंत एक्शन होना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही भारी पड़ सकती है।
इतना ही नहीं, एसपी ने पुराने और लंबे समय से लटके हुए मामलों की फाइलें भी जल्द से जल्द क्लियर करने का टास्क दिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस जनसुनवाई में आए आवेदनों को सिर्फ रद्दी में नहीं डाला जाएगा। एसपी ने साफ कहा है कि इन शिकायतों की पूरी निगरानी (Monitoring) की जा रही है और 15 दिनों के बाद वह खुद हिसाब लेंगे कि कितने मामलों का निपटारा हुआ। सीधी सी बात है—अब काम में ढिलाई बरतने वाले अफसरों की जवाबदेही तय होना पक्का है!

