दमोह में पेयजल संकट पर बड़ी कामयाबी: 40 में से 37 समस्याग्रस्त क्षेत्रों में पानी सप्लाई बहाल; कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश
दमोह – भीषण गर्मी के इस दौर में आम जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान न होना पड़े, इसे लेकर दमोह जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिले के ग्रामीण और शहरी अंचलों में पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव लगातार मैदानी स्तर पर समीक्षा कर रहे हैं। इसी सिलसिले में कलेक्टर कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान जिले के चिन्हित किए गए 40 पेयजल समस्या मूलक ग्रामों और टोलों की स्थिति की बारीकी से पड़ताल की गई। प्रशासन की त्वरित सक्रियता के चलते इन 40 गंभीर संकट वाले क्षेत्रों में से 37 क्षेत्रों की समस्याओं का पूरी तरह से निवारण कर दिया गया है और वहां नियमित रूप से जलापूर्ति बहाल कर दी गई है।
37 क्षेत्रों में व्यवस्था दुरुस्त, शेष 3 प्रभावित इलाकों में काम जारी
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बैठक में बताया कि पूर्व में की गई समीक्षा के दौरान जिले के 40 ऐसे क्रिटिकल क्षेत्र सामने आए थे, जहां स्थानीय निवासियों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा था। इसके समाधान के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) और जल निगम को तत्काल कड़े निर्देश जारी किए गए थे। वर्तमान समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 37 क्षेत्रों में बंद पड़ी नल-जल योजनाएं और तकनीकी खामियां दूर कर पानी की नियमित सप्लाई शुरू करा दी गई है।
वर्तमान में केवल तीन ऐसे क्षेत्र शेष बचे हैं, जहां पाइपलाइन विस्तार कार्य, पानी की टंकी के टूटने अथवा किसी बड़ी तकनीकी खराबी के कारण काम रुका हुआ है। कलेक्टर ने इन तीनों समस्या मूलक क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से युद्धस्तर पर मरम्मत और विस्तार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, जिले में एक नया प्रभावित क्षेत्र भी चिन्हित किया गया है, जहां पानी की किल्लत देखी गई है। वहां भी शीघ्र समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
स्थायी समाधान होने तक टैंकरों से होगी पानी की सप्लाई, लापरवाही पर मिलेगी सजा
कलेक्टर श्री यादव ने जिला पंचायत सीईओ, समस्त जनपद पंचायत सीईओ और नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों (CMO) को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि जिले के किसी भी नागरिक या परिवार को पेयजल की असुविधा नहीं होनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में तकनीकी खराबी के स्थायी समाधान में समय लग रहा है, वहां बिना किसी देरी के तत्काल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायतों के पास उपलब्ध मूलभूत फंड का उपयोग कर पेयजल के स्थायी कार्य कराए जाएं। जिन जटिल परियोजनाओं में अधिक बजट की आवश्यकता है, वहां संबंधित विभाग तुरंत डीपीआर (परियोजना प्रस्ताव) तैयार कर शासन को भेजें, ताकि राज्य स्तर से बजट स्वीकृत कराकर काम को स्थायी रूप से पूरा किया जा सके।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ सहित आला अधिकारी रहे मौजूद
कलेक्टर कार्यालय में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासनिक अमले सहित तकनीकी विभागों के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य रूप से जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे, जिले के समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), नगरीय निकायों के सीएमओ, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यपालन यंत्री और जल निगम के आला अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

