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दमोह: 12वीं के छात्र का क्लास टीचर पर गंभीर आरोप; 'पुरानी रंजिश में रेगुलर से बना दिया प्राइवेट, प्रैक्टिकल के नंबर भी गायब'

Student Shivank Thakur submitting complaint regarding board exam marksheet error in Damoh

दमोह – दमोह जिला मुख्यालय के पथरिया ब्लॉक अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बांसाकला से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कक्षा 12वीं के एक मेधावी छात्र ने अपने ही क्लास टीचर (कक्षा शिक्षक) पर पुरानी रंजिश के चलते उसका भविष्य संकट में डालने का संगीन आरोप लगाया है। छात्र का दावा है कि वह पूरे साल स्कूल में एक नियमित (रेगुलर) विद्यार्थी के रूप में पढ़ा, लेकिन रिजल्ट आने पर उसे स्वाध्यायी (प्राइवेट) दर्शा दिया गया। इस गंभीर विसंगति को लेकर पीड़ित छात्र और उसके परिजनों ने शुक्रवार को दमोह कलेक्टर तथा सागर संभाग के शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक (JD) को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

एडमिट कार्ड पर रेगुलर, लेकिन रिजल्ट में प्राइवेट; प्रैक्टिकल के अंक भी गायब

शिकायत दर्ज कराने पहुंचे पीड़ित छात्र शिवंक ठाकुर ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूल से जो एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) जारी किया गया था, उस पर बकायदा स्कूल के प्राचार्य के हस्ताक्षर और सील मौजूद हैं, जिसमें उसे साफ तौर पर 'नियमित छात्र' अंकित किया गया था। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि उसने पूरे सत्र नियमित रूप से कक्षाएं अटेंड की थीं।

हैरानी की बात यह है कि जब बोर्ड का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, तो उसकी मार्कशीट में उसे 'प्राइवेट छात्र' दर्शाया गया है। शिवंक ने बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 324 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी (First Division) हासिल की है। लेकिन मार्कशीट में 'प्राइवेट' लिखे होने और प्रैक्टिकल परीक्षाओं के अंक पूरी तरह गायब होने के कारण अब उसके आगे के करियर और कॉलेज एडमिशन पर संकट मंडराने लगा है। छात्र और उसके परिजनों का सीधा आरोप है कि कक्षा शिक्षक नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने पुरानी व्यक्तिगत रंजिश और द्वेष भावना के चलते जानबूझकर ऐसा किया है।

शिक्षक का पलटवार: 75% से कम उपस्थिति होने पर नियमानुसार हुई कार्रवाई

इस पूरे विवाद पर जब आरोपी क्लास टीचर नर्मदा प्रसाद अहिरवार से उनका पक्ष जाना गया, तो उन्होंने छात्र और परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया। शिक्षक का कहना है कि उन्होंने किसी रंजिश या द्वेष के तहत यह कदम नहीं उठाया है और न ही छात्र को कभी कोई धमकी दी है। उन्होंने विधिक नियमों का हवाला देते हुए बताया कि माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) के कड़े नियमानुसार, जिस भी विद्यार्थी की पूरे शैक्षणिक सत्र में कुल उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम दर्ज होती है, उसे परीक्षा फॉर्म के समय रेगुलर से प्राइवेट श्रेणी में कंवर्ट कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी जब चाहें, स्कूल का दैनिक उपस्थिति रजिस्टर (अटेंडेंस रजिस्टर) मंगाकर जांच कर सकते हैं, स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

प्राचार्य ने भी आरोपों को नकारा, बोले- सब कुछ नियमों के तहत हुआ

इस संवेदनशील मामले में बांसाकला स्कूल के प्राचार्य प्रशांत फट्टा ने भी शिक्षक का बचाव करते हुए छात्र के आरोपों को निराधार बताया है। प्राचार्य प्रशांत फट्टा ने स्पष्ट किया कि छात्र शिवंक ने इस मामले को लेकर दमोह जिला प्रशासन से लेकर सागर संभाग स्तर तक हर सक्षम फोरम पर शिकायतें दर्ज कराई हैं। लेकिन वास्तविकता यही है कि छात्र की स्कूल में उपस्थिति निर्धारित मापदंडों से काफी कम थी। कम उपस्थिति के कारण बोर्ड के नियमों के दायरे में रहकर ही यह पूरी वैधानिक कार्रवाई की गई है, इसमें किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत दुर्भावना शामिल नहीं है। फिलहाल, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच की जा रही है।