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छिंदवाड़ा में 1 लाख 79 हजार से अधिक नागरिकों को अक्षर ज्ञान तक नहीं; 'उल्लास अभियान' के तहत रात में लग रही चौपालें

Block-wise statistical bar chart of illiterate population in Chhindwara district showing total 179421 unlettered citizens

छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से शिक्षा और साक्षरता को लेकर एक बेहद चिंताजनक लेकिन ध्यानाकर्षण करने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है। आधुनिकता और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, जिले में आज भी करीब 1 लाख 79 हजार से अधिक ऐसे लोग निवास कर रहे हैं, जिन्हें पढ़ना-लिखना तो दूर, बुनियादी अक्षरों का ज्ञान तक नहीं है। जिला शिक्षा विभाग के लिए यह आंकड़ा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषकर आदिवासी बाहुल्य विकासखंड हर्रई और जुन्नारदेव में असाक्षरों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है, जिसने प्रशासनिक और शैक्षणिक हल्कों में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालांकि, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा विभाग ने अभी हार नहीं मानी है और ग्रामीण स्तर पर असाक्षरों को साक्षर करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

15 साल से अधिक उम्र के लाखों लोग बुनियादी शिक्षा से दूर; जुन्नारदेव-हर्रई में सर्वाधिक आंकड़े

आधिकारिक विश्लेषण और जनगणना के आधार पर चिह्नित किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 1,79,421 ऐसे नागरिक हैं जो पूरी तरह असाक्षर हैं। इन लोगों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से पिछले तीन वर्षों से 'उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान' चलाया जा रहा है। इसके बावजूद असाक्षरों का एक बहुत बड़ा अंतर अभी भी बना हुआ है।

विकासखंडवार (Block-wise) असाक्षरों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

विकासखंड (Block) असाक्षरों की संख्या (Number of Illiterates)
बिछुआ 7,426
सोंसर 7,506
मोहखेड़ 9,552
पांढुर्णा 9,663
तामिया 14,564
चौरई 16,010
अमरवाड़ा 16,134
छिंदवाड़ा 19,669
हर्रई 19,848
परासिया 27,874
जुन्नारदेव 31,175
कुल योग (Total) 1,79,421

'अक्षर साथी' बने सहारा: दिन में खेती-किसानी, रात में लगती हैं पाठशालाएं

चूँकि ग्रामीण अंचलों में अधिकांश असाक्षर लोग दिन के समय खेती-किसानी, मजदूरी और पशुपालन जैसे दैनिक आर्थिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं, इसलिए शिक्षा विभाग ने व्यावहारिक रास्ता निकाला है। इन लोगों के लिए गांवों में रातों के समय विशेष पाठशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इस अभियान की रीढ़ 'अक्षर साथी' हैं। अक्षर साथी वे स्वयंसेवक होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के इन असाक्षरों के बीच जाकर उन्हें बुनियादी ककहरा और संख्यात्मक ज्ञान सिखाते हैं। हालांकि, मैदानी स्तर पर अब भी एक बड़ी व्यावहारिक समस्या यह आती है कि परीक्षा वाले दिन इन प्रौढ़ शिक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक लाना एक बेहद मशक्कत भरा काम साबित होता है।

साल में दो बार मूल्यांकन: सितंबर 2026 और मार्च 2027 में होंगी आगामी परीक्षाएं

जिले को शत्-प्रतिशत साक्षर करने के विजन के साथ विभाग द्वारा साल में दो बार मूल्यांकन परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। इस शैक्षणिक सत्र में आगामी परीक्षाएं सितंबर 2026 और मार्च 2027 में आयोजित की जानी तय हुई हैं।

जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी मनोज दुबे के अनुसार: "नवभारत उल्लास कार्यक्रम के जरिए लोगों को साक्षर करने का काम जमीनी स्तर पर निरंतर जारी है. साल में दो बार मूल्यांकन परीक्षाएं लेकर हम लगातार प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं. इसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं और धीरे-धीरे असाक्षरों के आंकड़े कम हो रहे हैं। आने वाले कुछ महीनों में पुनः परीक्षा होगी और हमारा अंतिम लक्ष्य छिंदवाड़ा जिले को शत-प्रतिशत साक्षर करना है।"

क्या है राष्ट्रीय स्तर का 'नवभारत उल्लास प्रोग्राम'?

भारत सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' (NEP 2020) के अंतर्गत वर्ष 2023 में 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य रणनीतिक उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के उन सभी नागरिकों को बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान और आवश्यक जीवन कौशल प्रदान करना है, जो बचपन में किन्हीं कारणों से औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए थे। केंद्र सरकार ने इस अभियान के माध्यम से प्रतिवर्ष देश के लगभग 1 करोड़ लोगों को साक्षर करने का संकल्प लिया है, ताकि वर्ष 2030 तक संपूर्ण भारत को एक पूर्ण साक्षर राष्ट्र बनाया जा सके।