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बांदकपुर और मढ़कोलेश्वर धाम में शिवभक्तों का जनसैलाब! 3 साल बाद बना सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग

Devotees performing jalabhishek at Bandakpur and women doing Peepal tree parikrama on Somvati Amavasya in Damoh today news

दमोह, आशीष विश्वकर्मा सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे 'सोमवती अमावस्या' कहा जाता है। सोमवार को मध्य प्रदेश के दमोह जिले में आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। वर्ष 2026 की पहली सोमवती अमावस्या 'अधिक मास' (पुरुषोत्तम मास) में पड़ी है, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।

जिले के दो प्रमुख शिवालयों, प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री जागेश्वर नाथ धाम (बांदकपुर) और नरसिंहगढ़ के समीप स्थित मढ़कोलेश्वर धाम में सुबह से ही भगवान भोलेनाथ के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। बांदकपुर में भीड़ के अत्यधिक दबाव को देखते हुए मंदिर प्रबंधन को सुरक्षा की दृष्टि से गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित करना पड़ा, जिसके बाद भक्तों ने बाहर से ही जलाभिषेक किया। वहीं, मढ़कोलेश्वर धाम में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

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तीन वर्ष में एक बार बनता है यह दुर्लभ संयोग

आचार्य विकास के अनुसार, वर्तमान में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) चल रहा है और इस मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या एक अत्यंत दुर्लभ संयोग मानी जाती है।

"लगभग तीन वर्ष में एक बार ऐसा अवसर निर्मित होता है, जब अधिक मास की अमावस्या सोमवार के दिन आती है। धार्मिक दृष्टि से यह संयोग बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। जिस प्रकार पितृ पक्ष अपने पूर्वजों को समर्पित माना जाता है, उसी प्रकार पुरुषोत्तम मास में आने वाली अमावस्या भी पितरों की शांति और तृप्ति के लिए विशेष मानी जाती है।"

बांदकपुर: रात से ही पहुंचने लगे थे श्रद्धालु, गर्भगृह बंद

सोमवती अमावस्या के विशेष महत्व के चलते बांदकपुर स्थित श्री जागेश्वर नाथ धाम में दर्शनार्थियों के पहुंचने का सिलसिला रविवार रात से ही प्रारंभ हो गया था। सोमवार अल सुबह जब मंदिर के पट खोले गए, तब तक परिसर में शिवभक्तों की लंबी कतारें लग चुकी थीं।

अत्यधिक भीड़ होने के कारण मंदिर के भीतर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले, इसे ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन ने एहतियातन गर्भगृह को आम दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया।

  • सुचारू दर्शन व्यवस्था: गर्भगृह बंद होने के बावजूद भक्तों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर शांतिपूर्ण ढंग से मंदिर के बाहर स्थापित विशेष पात्रों के माध्यम से भगवान शिव का जलाभिषेक किया और बेलपत्र अर्पित किए।
  • प्रशासनिक मुस्तैदी: लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के आवागमन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद रहा। मंदिर प्रबंधक रामकृपाल पाठक के नेतृत्व में विशेष व्यवस्थाएं की गईं। वहीं, हिंडोरिया तहसीलदार प्रीतम सिंह, एसडीओपी प्रिया सिंधी और थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय भारी पुलिस बल के साथ परिसर में उपस्थित रहे।

त्रिवेणी संगम स्थित मढ़कोलेश्वर धाम में आस्था की डुबकी

बांदकपुर के अतिरिक्त दमोह जिले के नरसिंहगढ़ के समीप मढ़कोले ग्राम में स्थित प्राचीन मढ़कोलेश्वर धाम में भी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ देखी गई। सुनार, कोपरा और जूड़ी नदी के त्रिवेणी संगम पर स्थित इस शिव मंदिर में सुबह से ही भक्तों का आना जारी रहा।

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  • संगम में स्नान और पूजन: हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम की पवित्र जलधारा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया और भगवान मढ़कोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन व जलाभिषेक किया।
  • पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा: इस पावन पर्व पर दमोह जिले में सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर विशेष पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की 108 प्रदक्षिणा (फेरी) देकर और सूत का धागा लपेटकर अपने अखंड सौभाग्य की कामना की। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर लगाकर मंगल कामनाएं कीं।

19 जून से 12 जुलाई तक ही होंगे विवाह के आयोजन

सोमवती अमावस्या के इस पुण्य काल के बीच, आगामी मांगलिक कार्यों को लेकर भी ज्योतिषीय गणनाएं और तिथियां सामने आई हैं।

  • विवाह के मुहूर्त: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 19 जून से 12 जुलाई तक का समय शुभ एवं मांगलिक कार्यों (शादी-विवाह) के लिए उपलब्ध रहेगा।
  • मांगलिक कार्यों पर विराम: इसके पश्चात 15 जुलाई को गुरु अस्त हो जाएंगे तथा 25 जुलाई को 'देवशयनी एकादशी' लग जाएगी।
  • चातुर्मास का आरंभ: देवशयनी एकादशी के प्रभाव से मांगलिक कामों पर फिर से विराम लग जाएगा। इसके बाद चातुर्मास आरंभ होने के साथ लगभग साढ़े चार महीने तक विवाह सहित अधिकांश शुभ संस्कार संपन्न नहीं होंगे।