दमोह में 'ऑपरेशन क्लीन बेलाताल' का शंखनाद: टीम उम्मीद की शानदार पहल, प्रशासनिक अफसरों ने भी किया श्रमदान
दमोह, ब्यूरो रिपोर्ट। दमोह शहर की पहचान और गौरव कहे जाने वाले ऐतिहासिक 'बेलाताल' को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक महा-अभियान की शुरुआत हो चुकी है। शहर के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर हरीश पटेल के नेतृत्व में 'टीम उम्मीद' ने "ऑपरेशन क्लीन बेलाताल" का बीड़ा उठाया है। यह 20 दिवसीय विशेष अभियान है, जिसका लक्ष्य सिर्फ सफाई करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों में अपनी धरोहर के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि जिले के आला अधिकारी भी फावड़ा और तगाड़ी उठाकर श्रमदान कर रहे हैं।
अभियान के शुरुआती तीन दिनों का रिपोर्ट कार्ड:
- पहला दिन (शुरुआत और आस्था के नाम पर कचरा): अभियान के पहले दिन सुबह 7 बजे से 8:30 बजे तक घाटों की सफाई की गई। इस दौरान लगभग एक ट्रॉली कचरा निकाला गया। सबसे दुखद बात यह रही कि तालाब के किनारों पर पॉलिथीन के साथ-साथ आस्था के नाम पर फेंकी गई भारी मात्रा में सामग्री मिली। इनमें भगवान की खंडित मूर्तियां, फटी हुई रामायण-गीता की पुस्तकें, फोटो फ्रेम, चुनरी और पूजा की सड़ी-गली सामग्री शामिल थी।
- दूसरा दिन (अफसरों ने किया श्रमदान): दूसरे दिन के अभियान में जिला प्रशासन ने भी कदम से कदम मिलाया। जिला पंचायत सीईओ श्री प्रवीण फुलपगारे और नगर पालिका सीएमओ श्री राजेंद्र सिंह लोधी ने खुद मैदान में उतरकर श्रमदान किया और टीम उम्मीद का हौसला बढ़ाया।
- तीसरा दिन (बदलाव की तस्वीर): लगातार सफाई के बाद अब बेलाताल के घाटों की तस्वीर बदलने लगी है। टीम उम्मीद के सदस्यों ने साफ कर दिया है कि लक्ष्य भले ही कठिन हो, लेकिन असंभव बिल्कुल नहीं है।
हरीश पटेल की मार्मिक अपील- "पुण्य की जगह पाप के भागीदार न बनें"
स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर हरीश पटेल ने तालाब किनारों पर पड़ी धार्मिक सामग्री को देखकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने शहरवासियों से मार्मिक अपील करते हुए कहा:
"जिन देवी-देवताओं को हम बड़ी आस्था और शिद्दत से पूजते हैं, उनकी तस्वीरें और धार्मिक पुस्तकें सड़ी-गली अवस्था में गंदगी के बीच पड़ी मिलना बेहद दुखद है। हम जाने-अनजाने में पुण्य की जगह पाप के भागीदार बन रहे हैं। ईश्वर के प्रतिरूपों को गंदगी में न डालें, उन्हें उचित तरीके से बहते पानी में विसर्जित करें या भूमिगत करें, लेकिन तालाबों को प्रदूषित न करें।"
घर बैठकर सोचने से शहर की तस्वीर नहीं बदलती!
टीम उम्मीद ने दमोह के नागरिकों को सीधा संदेश दिया है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर आलोचना करने या घर बैठकर सोचने से शहर साफ नहीं होगा। बदलाव लाने के लिए स्वयं मैदान में उतरकर पसीना बहाना पड़ता है। जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक सुशील नामदेव ने बताया कि इस 20 दिवसीय अभियान में नियमित सफाई के साथ-साथ जन-जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम भी होंगे।
शामिल होने वाले प्रमुख लोग: इस महा-अभियान में हरीश पटेल के साथ माधव पटेल, धर्मेंद्र सोनी, शिवम सोनी, राकेश राठौर, ब्रजेश सेन, जितेंद्र अहिरवार, काजल पांडे, अर्जुन प्रताप सिंह, अनिल जैन सहित जन अभियान परिषद के सदस्य और नगर पालिका के कर्मचारी पूरे जोश के साथ 'कठिन है, पर असंभव नहीं' के नारे के साथ जुटे हुए हैं।
अगर आप भी दमोह के सच्चे नागरिक हैं, तो सुबह 7:00 बजे से 8:30 बजे तक बेलाताल पहुंचें और अपने शहर को स्वच्छ बनाने में 1 घंटे का श्रमदान जरूर करें!

