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NEET विवाद के बीच MP में एक और परीक्षा पर आफत: भोपाल में तकनीकी खराबी से वनरक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित, 20 जून को दोबारा पेपर

Angry aspirants protesting outside Mittal College exam center in Bhopal due to MPESB Vanrakshak exam cancellation amid national NEET controversy

भोपाल: देश भर में नीट (NEET) परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों का गुस्सा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि मध्य प्रदेश में एक और बड़ी सरकारी भर्ती परीक्षा तकनीकी खामियों की वजह से विवादों के घेरे में आ गई है। राजधानी भोपाल के एक प्रमुख परीक्षा केंद्र पर रविवार को तकनीकी खराबी और सर्वर डाउन होने के कारण वनरक्षक भर्ती परीक्षा की दूसरी पाली (सेकंड शिफ्ट) आयोजित नहीं की जा सकी। घंटों इंतजार करने के बाद जब अभ्यर्थियों को परीक्षा स्थगित होने की आधिकारिक सूचना मिली, तो छात्रों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने केंद्र परिसर के भीतर ही उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

भोपाल के मित्तल कॉलेज केंद्र पर नहीं शुरू हो सकी दूसरी पाली की परीक्षा

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा इन दिनों वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी और सहायक जेल अधीक्षक के पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा 4 जून से 19 जून 2026 तक आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी में रविवार (7 जून) को दोपहर 2:30 बजे से परीक्षा की दूसरी पाली शुरू होनी थी।

भोपाल के आनंद नगर स्थित मित्तल कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद प्रवेश तो दे दिया गया, लेकिन इसके बाद सिस्टम लॉक हो गए। केंद्र प्रबंधन की ओर से लगातार छात्रों को यह दिलासा दिया जाता रहा कि तकनीकी समस्या को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। हालांकि, कई घंटे बीत जाने के बाद भी जब कंप्यूटर स्क्रीन्स चालू नहीं हुईं, तब जाकर अधिकारियों ने अंततः सर्वर पूरी तरह फेल होने और परीक्षा आयोजित न करा पाने की बात स्वीकार की।

घंटों इंतजार के बाद फूटा छात्रों का गुस्सा, पुलिस ने संभाली स्थिति

परीक्षा रद्द होने की भनक लगते ही परीक्षा केंद्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। बड़ी संख्या में छात्र और उनके परिजन कॉलेज परिसर में ही धरने पर बैठ गए और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) तथा कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे।

छात्रों के मुख्य आरोप:

  • आधिकारिक सूचना का अभाव: अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि तकनीकी समस्या इतनी गंभीर थी, तो उन्हें समय रहते स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई और घंटों तक बंधक जैसी स्थिति में क्यों रखा गया?
  • प्रशासनिक लापरवाही: छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की घोर लापरवाही का खामियाजा दूर-दराज से आए युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।

विरोध प्रदर्शन और हंगामे की स्थिति को देखते हुए परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और आक्रोशित छात्रों को समझा-बुझाकर केंद्र परिसर से बाहर निकाला। हालांकि इस दौरान किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं है, लेकिन छात्रों में व्यवस्था को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई।

दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी

इस अव्यवस्था के कारण सबसे ज्यादा मार उन अभ्यर्थियों पर पड़ी जो मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों और सुदूर जिलों से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके अपनी जमा-पूंजी खर्च कर भोपाल पहुंचे थे। कई छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि लंबे इंतजार के दौरान परीक्षा केंद्र पर पीने के पानी और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। सुबह से भूखे-प्यासे बैठे उम्मीदवारों को शाम को केवल अनिश्चितता और निराशा हाथ लगी। इस हंगामे के बीच कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठाते हुए धांधली और पेपर लीक जैसी आशंकाएं भी व्यक्त कीं, हालांकि इस संबंध में किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक कोई पुष्टि नहीं की है।

अब 20 जून 2026 को होगी दोबारा परीक्षा: MPESB ने जारी किया आदेश

शाम को बढ़ते विवाद को देखते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने देर रात एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर परीक्षा स्थगित करने की पुष्टि की। मंडल द्वारा जारी नए शेड्यूल के अनुसार:

  • नई परीक्षा तिथि: 7 जून की दूसरी पाली से प्रभावित हुए सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा अब 20 जून 2026 (शनिवार) को आयोजित की जाएगी।
  • समय सारणी: यह परीक्षा अब प्रथम पाली में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक संपन्न होगी।
  • प्रवेश पत्र: प्रभावित उम्मीदवारों को परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए नए सिरे से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने होंगे, जो जल्द ही MPESB की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिए जाएंगे।

उधर, छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने मांग की है कि केवल परीक्षा की नई तारीख दे देना ही इस समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को इस सर्वर फेलियर और तकनीकी चूक के लिए जिम्मेदार आउटसोर्सिंग एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में प्रदेश के युवाओं के भविष्य और समय के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा न हो सके।