MP Rajya Sabha Election 2026: बीजेपी ने उतारा तीसरा उम्मीदवार, क्रॉस वोटिंग के खतरे से कांग्रेस में खलबली; मीनाक्षी नटराजन की राह हुई मुश्किल
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद दिलचस्प और राजनीतिक रूप से सरगर्म हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रणनीतिक दांव खेलते हुए राज्य से अपना तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार दिया है. बीजेपी के इस कदम के बाद अब तीन सीटों के लिए कुल चार उम्मीदवार मैदान में आ गए हैं, जिससे आगामी 18 जून को होने वाले मतदान में क्रॉस वोटिंग की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं.
बीजेपी द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद सबसे बड़ा संकट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर मंडराने लगा है. इस सीट पर अब सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के महेश केवट और कांग्रेस की दिग्गज नेता मीनाक्षी नटराजन के बीच तय हो गया है.
तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल पहले ही कर चुके हैं नामांकन
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के समीकरण को देखा जाए तो भाजपा ने दो सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नामों की घोषणा पहले ही कर दी थी. इन दोनों ही अधिकृत उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया है.
माना जा रहा था कि दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस की निर्विरोध जीत हो जाएगी, लेकिन ऐन वक्त पर महेश केवट को तीसरी सीट के लिए उतारकर भाजपा ने कांग्रेस के खेमे में हड़कंप मचा दिया है और मीनाक्षी नटराजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
जानिए कौन हैं महेश केवट? जिन्हें भाजपा ने बनाया उम्मीदवार
तीसरे उम्मीदवार के रूप में सामने आए महेश केवट (Mahesh Kewat) मध्य प्रदेश की राजनीति में एक जमीनी और सांगठनिक चेहरा माने जाते हैं. वर्तमान में वह मध्य प्रदेश में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्हें राज्यसभा का टिकट देकर भाजपा ने राज्य के बड़े मछुआरा वर्ग को एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है.
महेश केवट का सांगठनिक सफरनामा:
- आरएसएस से जुड़ाव: महेश केवट वर्ष 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सक्रिय स्वयंसेवक हैं और ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक के रूप में दायित्व निभा चुके हैं.
- विद्यार्थी परिषद: अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक के रूप में सांगठनिक कार्य किया.
- सक्रिय राजनीति: वर्ष 1995 से वे भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हैं. वे वर्ष 2000 में पार्षद निर्वाचित हुए और नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी रहे.
- महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां: भाजपा संगठन में वे जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जैसे अहम पदों पर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, सहित चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर के महत्वपूर्ण उपचुनावों में संगठन की ओर से अहम चुनावी प्रबंधन संभाला है.
आंकड़ों का गणित: कांग्रेस के पास 62 वोट, एकजुट रखना बड़ी चुनौती
मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर राज्यसभा की एक सीट को जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है.
वोटों का मौजूदा समीकरण:
- कांग्रेस की स्थिति: सदन में कांग्रेस के पास कुल 62 वोट उपलब्ध हैं. तकनीकी रूप से यह आंकड़ा एक सीट जीतने के लिए जरूरी 58 वोटों से 4 अधिक है.
- भाजपा की स्थिति: भारतीय जनता पार्टी को अपनी तीसरी सीट निकालने के लिए अपने मौजूदा विधायकों के अतिरिक्त केवल 8 और वोटों की आवश्यकता है.
यही वह 8 वोटों का फासला है जिसने कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है. चूंकि मध्य प्रदेश कांग्रेस में पूर्व में भी विधायकों की टूट और पाला बदलने का इतिहास रहा है, इसलिए 18 जून को होने वाले मतदान में क्रॉस वोटिंग का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है. मीनाक्षी नटराजन की सुरक्षित जीत के लिए कांग्रेस को अपने सभी 62 विधायकों को एकजुट रखना होगा, जो इस समय सबसे बड़ी चुनौती नजर आ रही है.
कर्नाटक से भाजपा ने डॉ. एम नागराज को दिया टिकट
मध्य प्रदेश के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने कर्नाटक में होने वाले द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भी अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है. भाजपा ने कर्नाटक से डॉ. एम नागराज को अपना उम्मीदवार बनाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. नागराज वर्तमान में पार्टी की बिल्डिंग कमेटी के प्रमुख हैं, जिनका मुख्य कार्य राज्य के प्रत्येक जिले में भाजपा कार्यालयों का निर्माण और प्रबंधन देखना है.
इसके अतिरिक्त, कर्नाटक विधान परिषद् द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए भाजपा ने लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है.

