दमोह: कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य सेवाओं की पोल, PHC सदगुवां से 9 कर्मचारी नदारद, 3 दिन का वेतन कटा
दमोह। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए प्रशासन अब सख्त रुख अपना रहा है। शुक्रवार को दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) सदगुवां का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई और भारी अनुशासनहीनता तथा लापरवाही उजागर हुई।
निरीक्षण के समय अस्पताल में कुल 09 अधिकारी और कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना या सक्षम अधिकारी की अनुमति के अपने कर्तव्य स्थल से गायब मिले। इस लापरवाही पर त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का 3 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।
'सार्थक पोर्टल' पर फर्जी हाजिरी का खुलासा
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला उपस्थिति में फर्जीवाड़े का सामने आया। कलेक्टर द्वारा 'सार्थक पोर्टल' (Sarthak Portal) का अवलोकन करने पर पाया गया कि फार्मासिस्ट योगेश शरण सिंह और एएनएम (ANM) आरती गौड़ द्वारा पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी गई थी, लेकिन भौतिक सत्यापन में वे दोनों संस्था से नदारद पाए गए।
कलेक्टर श्री यादव ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही से शासकीय योजनाओं के संचालन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान ये अधिकारी और कर्मचारी मिले अनुपस्थित:
अस्पताल से बिना अनुमति गायब रहने वाले कर्मचारियों की सूची में डॉक्टर से लेकर लैब टेक्नीशियन तक शामिल हैं:
- डॉ. आयुष भूमिया (बंधपत्र चिकित्सक)
- डॉ. पुष्पेन्द्र त्रिपाठी (आयुष चिकित्सा अधिकारी)
- योगेश शरण सिंह (फार्मासिस्ट ग्रेड-2)
- संध्या बिसेन (नर्सिग ऑफीसर)
- आरती सिंह गौड़ (एएनएम)
- पियूष खटीक (लैब टैक्नीशियन)
- प्रकाश सेन (आयुष फार्मासिस्ट)
- सतीश विश्वकर्मा (संविदा फार्मासिस्ट)
- गुलाब प्रसाद चक्रवर्ती (संविदा नर्सिग ऑफीसर)
3 दिन का वेतन कटा, जवाब तलब
कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने तत्काल प्रभाव से कड़ा एक्शन लिया है। सभी 09 अनुपस्थित कर्मचारियों के माह जून 2026 के वेतन से 03 दिवस का वेतन काटे जाने (वेतन कटौत्रा) के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
इसके साथ ही सभी को नोटिस जारी कर निर्देशित किया गया है कि वे अपना स्पष्टीकरण उचित माध्यम से 03 दिवस के भीतर प्रस्तुत करें। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उत्तर नहीं दिया जाता है या जवाब समाधानकारक नहीं पाया जाता है, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
