दमोह: मिलावटखोरों की अब खैर नहीं! कलेक्टर ने दिए खाद्य पदार्थों की सघन जांच और सैंपलिंग के सख्त निर्देश
दमोह। जिले में आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले और अमानक स्तर की खाद्य सामग्री बेचने वाले व्यापारियों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने जा रहा है। जिले में 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006' के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से जिला स्तरीय स्टीयरिंग समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक की अध्यक्षता दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने की। बैठक में अभिहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा प्रशासन) द्वारा एजेंडा प्रस्तुत किया गया, जिसकी विस्तृत समीक्षा के बाद कलेक्टर ने जिले भर के खाद्य प्रतिष्ठानों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने वाली सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बैठक में कलेक्टर द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश:
- ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस: कलेक्टर श्री यादव ने खाद्य सुरक्षा प्रशासन को निर्देशित किया है कि ग्रामीण अंचलों में स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच की जाए और वहां बिकने वाली सामग्री के अधिक से अधिक संख्या में नमूने (Sample) लिए जाएं।
- मध्यान्ह भोजन और आंगनवाड़ी की जांच: बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनवाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों में बंटने वाले 'मध्यान्ह भोजन' (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता की निरंतर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
- एक्सपायरी और अमानक सामग्री पर रोक: बाजार में एक्सपायरी डेट और अमानक स्तर की खाद्य सामग्री की बिक्री को पूरी तरह रोकने के लिए निरंतर निरीक्षण और नमूना संग्रहण की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- मौसमी खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग: मौसम के अनुसार बाजार में आने वाले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की शुद्धता जांचने के लिए भी विभाग को लगातार अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
एसडीएम (SDM) के निर्देशन में चलेगा साप्ताहिक अभियान
जिले के सभी क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय की गई है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के प्रत्येक अनुविभाग (Sub-division) में अनुविभागीय अधिकारी (SDM) के निर्देशन में साप्ताहिक रूप से निरीक्षण और नमूना संग्रहण का अभियान चलाया जाएगा।
प्रशासन की इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले के नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके। समिति में शामिल सभी अधिकारियों को इन निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
