दमोह: मायसेम सीमेंट फैक्ट्री में मजदूरों के शोषण की खुली पोल, कलेक्टर के छापे में सामने आईं बड़ी खामियां; केस दर्ज करने के निर्देश
दमोह, ब्यूरो रिपोर्ट। दमोह जिले के नरसिंहगढ़ स्थित मायसेम (हेडलबर्ग) सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों का कथित तौर पर शोषण किए जाने का मामला सामने आया है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद मंगलवार शाम दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सीधे मजदूरों से संवाद किया, जिसमें फैक्ट्री प्रबंधन की बड़ी लापरवाहियां और श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन की पोल खुल गई। मजदूरों के बयानों को आधार बनाते हुए कलेक्टर ने श्रम विभाग को तत्काल फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मजदूरों का दर्द: खुद के पैसों से खरीदना पड़ रहा हेलमेट
कलेक्टर के सामने मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन की मनमानी का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं:
- नियमितीकरण और वेतन का रोना: मजदूरों ने बताया कि कई सालों से काम करने के बावजूद उन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया है। इसके अलावा, वेतन (सैलरी) एकमुश्त न देकर किस्तों में दिया जाता है और उसमें भी कटौती की जाती है।
- ओवरटाइम का पैसा गोल: शासन द्वारा निर्धारित 8 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता है, लेकिन न तो कलेक्ट्रेट रेट के अनुसार भुगतान किया जा रहा है और न ही ओवरटाइम (Overtime) का दोगुना पैसा दिया जा रहा है। यहां तक कि वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) भी नहीं मिलती।
- सेफ्टी गियर का अभाव: सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कंपनी मजदूरों को हेलमेट, सुरक्षा जूते और चश्मे जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण (Safety Gear) तक नहीं देती। मजबूरी में मजदूरों को ये चीजें अपने पैसों से खरीदनी पड़ती हैं।
काम के दौरान टूटे 6 दांत, कंपनी ने नहीं कराया इलाज
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन की संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण सामने आया। एक श्रमिक ने कलेक्टर को बताया कि काम के दौरान हुए हादसे में उसके छह दांत टूट गए थे, लेकिन कंपनी ने उसका कोई इलाज नहीं कराया। इस बात पर कलेक्टर ने सख्त नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर दुर्घटना होने पर कर्मचारी के पूर्ण उपचार की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ कंपनी की होगी।
इसके अलावा, मजदूरों के भोजन के लिए भी फैक्ट्री परिसर में कोई उचित और व्यवस्थित जगह नहीं पाई गई।
गाड़ियां सड़क पर, चोरियों का डर
मजदूरों ने पार्किंग की समस्या भी उठाई। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री के अंदर वाहन खड़े करने की जगह नहीं है, जिससे गाड़ियां बाहर सड़क पर खड़ी करनी पड़ती हैं और आए दिन पेट्रोल तथा वाहन चोरी की घटनाएं होती हैं। इस पर कलेक्टर ने प्रबंधन को कड़ी हिदायत दी कि वे परिसर के अंदर सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था करें।
साथ ही, श्रम विभाग के नियमों के अनुसार फैक्ट्री में जो आवश्यक सूचना बोर्ड लगे होने चाहिए थे, वे भी वहां नदारद मिले।
कलेक्टर की दो टूक: स्थानीय युवाओं को मिले प्राथमिकता
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने साफ शब्दों में कहा:
"शासन श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक श्रमिक को उसका वैधानिक अधिकार मिले और फैक्ट्री परिसर में श्रम कानूनों का पूर्णतः पालन हो। इसके अलावा, तकनीकी कार्यों को छोड़कर बाकी रोजगार में स्थानीय लोगों और युवाओं को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
कलेक्टर ने श्रम विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इस औचक निरीक्षण के दौरान पथरिया एसडीएम निकेत चौरसिया, नायब तहसीलदार वृदेश पांडे और श्रम अधिकारी सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

