बांदकपुर कॉरिडोर निर्माण: कलेक्टर की समीक्षा बैठक के दौरान हंगामा, अतिक्रमण की अफवाह पर भिड़े दो पक्ष; काम की धीमी गति पर भड़के अधिकारी

Collector Pratap Narayan Yadav conducting review meeting at Bandakpur Damoh

दमोह। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल जागेश्वरधाम बांदकपुर में शनिवार को उस समय स्थिति असहज हो गई, जब कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की मौजूदगी में चल रही समीक्षा बैठक के बीच ही दो पक्ष आपस में उलझ गए। झंडा बाजार की दुकानों को हटाने और अतिक्रमण की अफवाहों को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जिसे वहां मौजूद एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद शांत कराया। वहीं, बांदकपुर कॉरिडोर निर्माण की धीमी गति को देखकर कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी के प्रति सख्त नाराजगी जाहिर की है।

दुकानों पर अतिक्रमण के दावों को लेकर उपजा विवाद

समीक्षा बैठक के दौरान खसरा नंबर 180 (झंडा बाजार) स्थित दुकानों के अस्तित्व को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। बांदकपुर सरपंच सुनील डब्लू और स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इन दुकानों को अवैध बताकर गिराने की भ्रामक अफवाहें फैलाई जा रही हैं।

चर्चा के दौरान सरपंच ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से आबादी क्षेत्र के अंतर्गत आता है और पूर्व में हुई शासकीय जांच में भी यहाँ किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं पाया गया है। इसी बात को लेकर बैठक में मौजूद दो पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। माहौल गरमाता देख एसडीएम सौरभ गंधर्व ने तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को समझाइश देकर शांत कराया।

समय सीमा बीतने के बाद भी आधा काम अधूरा

परियोजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। तय समय सीमा के अनुसार 30 मई 2026 तक पहले फेज का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन धरातल पर अब तक 50% काम भी पूरा नहीं हो सका है। कलेक्टर ने इस स्थिति को बेहद 'आपत्तिजनक' करार देते हुए संबंधित निर्माण एजेंसी को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने और दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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कलेक्टर ने यह भी माना कि इस परियोजना को तैयार करते समय स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के व्यावहारिक सुझावों को नजरअंदाज किया गया, जो बैठक में हुए विवाद की एक बड़ी वजह बना। उन्होंने एजेंसी को सख्त हिदायत दी है कि भविष्य का निर्माण कार्य जन-भावनाओं और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही किया जाए।

100 करोड़ का प्रोजेक्ट, गुणवत्ता से समझौता नहीं

लगभग 100 करोड़ रुपए की भारी-भावुक लागत से आकार ले रहे इस भव्य कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर कलेक्टर ने कहा कि यह परियोजना पूरे दमोह जिले की आस्था और सपने से जुड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रोजेक्ट को गति दें ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन लाभ मिल सके।