प्यासी जनता और 'अनुभवी' विधायक का कागजी निरीक्षण; सालों तक सत्ता संभालने के बाद भी पानी को तरस रहा शहर
दमोह। भीषण गर्मी के दौर में दमोह की जनता जब पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रही है, तब क्षेत्र के विधायक और पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया का रविवार को फिल्टर प्लांट पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। 1990 से (2018-23 के बीच के समय को छोड़कर) क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता द्वारा आज भी पाइपलाइनों और भविष्य की योजनाओं का हवाला देना शहर की वर्तमान प्यास पर सवाल खड़े कर रहा है।
दशकों का 'अनुभव' और फेल होता सिस्टम
जयंत मलैया मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय प्रशासन, विकास, आवास और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इसके बावजूद दमोह की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है:
- अनियमित सप्लाई: शहर के अधिकांश हिस्सों में वर्तमान में दो दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है।
- संकट गहराया: कई इलाकों में जल आपूर्ति का अंतराल इससे भी अधिक है, जिससे लोग बेहाल हैं।
- लो प्रेशर की समस्या: विधायक ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि शहर के कई क्षेत्रों में पानी का दबाव (Pressure) बहुत कम है।
जनता से अपील या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना?
निरीक्षण के दौरान विधायक ने नागरिकों से पानी बचाने और वाल्व बंद करने में सहयोग करने की अपील की। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि जब सिस्टम पर्याप्त दबाव के साथ पानी देने में ही सक्षम नहीं है, तब "वाल्व बंद करने" जैसी जिम्मेदारी जनता पर डालना प्रशासन की कमियों को छिपाने जैसा है। यह कार्य मूलतः नगर पालिका अमले का है, लेकिन इसका बोझ भी अब जनता के पाले में दिखता है।
बजट के जादूगर, फिर भी दमोह सूखा
प्रदेश के वित्त मंत्री रहे मलैया अब राजनगर तालाब में बन रहे नए इंटेक वेल को समाधान के रूप में पेश कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि दशकों तक सत्ता और संसाधनों के शीर्ष पर रहने के बाद भी दमोह में प्रतिदिन जल आपूर्ति सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी? टंकियों के माध्यम से दबाव बनाने की योजना एक अस्थायी व्यवस्था (Patchwork) नजर आती है, जबकि बढ़ती आबादी के लिए किसी ठोस दूरगामी कार्ययोजना का अभाव स्पष्ट है।
नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ यह निरीक्षण जनता के लिए राहत से ज्यादा एक औपचारिक प्रक्रिया नजर आता है। दमोह की जनता अब आश्वासनों के बजाय अपने नलों में नियमित और पर्याप्त पानी की मांग कर रही है।
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