दमोह में खुदाई के दौरान 'चांदी का खजाना' मिलने से हड़कंप: ब्रिटिश कालीन सिक्कों को लेकर मची रार, पुरातत्व विभाग की टीम जांच में जुटी
दमोह। दमोह शहर के फुटेरा वार्ड क्रमांक 3 में एक मकान के निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में चांदी के सिक्कों का एक बड़ा जखीरा मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। रविवार दोपहर को हुई इस घटना के बाद मजदूरों और मकान मालिक के बीच सिक्कों की संख्या को लेकर उपजे विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद मामला पुलिस और पुरातत्व विभाग की दहलीज तक पहुंच गया है। इस घटना ने एक बार फिर जिले के ऐतिहासिक वैभव और जमीन के नीचे दबे रहस्यों की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया है।
मजदूरों और मकान मालिक के बीच 'हिस्से' को लेकर फूटा भांडा
मिली जानकारी के अनुसार, फुटेरा वार्ड क्रमांक 3 के निवासी और शासकीय शिक्षक आलोक सोनी के पैतृक मकान में पिलर खड़े करने के लिए बेस की खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान वहां काम कर रहे मजदूरों को जमीन के नीचे दबा एक पीतल का कलश मिला।
खुदाई कर रहे मजदूरों का आरोप है कि उस कलश में करीब 35 किलोग्राम वजन के चांदी के सिक्के और प्राचीन रॉड थीं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि खजाना मिलते ही मकान मालिक आलोक सोनी ने चतुराई दिखाते हुए सारे सिक्कों को तुरंत अपनी एक बाल्टी में भर लिया। इसके बाद उन्होंने मजदूरों को चुपचाप केवल 500-500 रुपये देकर वहां से विदा कर दिया। जब मजदूरों को लगा कि खजाने में से उन्हें उनका वाजिब हिस्सा नहीं मिला, तो उन्होंने इसकी गुप्त सूचना पूर्व सरपंच मुरारी तिवारी को दे दी। पूर्व सरपंच की सक्रियता के कारण यह मामला तुरंत जिला प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया।
प्रशासन और पुरातत्व विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
जमीन के अंदर से भारी मात्रा में चांदी मिलने की खबर आग की तरह फैली, जिसके बाद प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी (टीआई) मनीष कुमार, तहसीलदार रोबिन सिंह और नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ पुरातत्व विभाग के अधिकारी शुभम अर्जरिया भी जांच के लिए घटना स्थल पर पहुंचे।
प्रशासनिक टीम द्वारा की गई शुरुआती कार्रवाई में निम्नलिखित बातें सामने आई हैं:
- सिक्कों की बरामदगी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मकान मालिक आलोक सोनी के कब्जे से ब्रिटिश काल के 42 चांदी के सिक्के बरामद किए। इसके अलावा, मामले की गंभीरता को देखते हुए जब अन्य संदिग्ध स्थानों पर दबिश दी गई, तो एक जगह स्टील के डिब्बे में छुपाकर रखे गए कुछ और सिक्के भी जब्त किए गए।
- महारानी विक्टोरिया के दौर के हैं सिक्के: पुरातत्व अधिकारी शुभम अर्जरिया ने सिक्कों का प्राथमिक निरीक्षण करने के बाद बताया कि ये सिक्के करीब 18वीं और 19वीं शताब्दी के (ब्रिटिश कालीन) हैं। इन प्राचीन सिक्कों पर तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य की महारानी विक्टोरिया और जॉर्ज पंचम की तस्वीरें साफ तौर पर अंकित हैं।
दावों में भारी विरोधाभास: 35 किलो बनाम 42 सिक्के
इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले में अब सबसे बड़ा सस्पेंस खजाने की वास्तविक मात्रा को लेकर बन गया है। जहाँ एक तरफ खुदाई करने वाले मजदूर पूरी जिम्मेदारी के साथ एक बड़े पीतल के कलश में 35 किलो चांदी और रॉड होने का दावा ठोक रहे हैं; वहीं दूसरी तरफ मकान मालिक आलोक सोनी ने इन सभी आरोपों को सिरे से काल्पनिक और झूठा करार दिया है। आलोक सोनी का कहना है कि खुदाई में केवल 42 सिक्के ही निकले थे, जिन्हें उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।
क्या कहता है कानून और क्या होगी आगे की कार्रवाई?
'इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878' (Indian Treasure Trove Act) के कड़े नियमों के मुताबिक, जमीन के नीचे छिपा हुआ कोई भी प्राचीन धन, सिक्के या ऐतिहासिक वस्तुएं स्वाभाविक रूप से सरकारी संपत्ति (State Property) के दायरे में आती हैं। जमीन का मालिक उस पर सीधे अपना दावा नहीं ठोक सकता।
कोतवाली पुलिस के अनुसार, इस समय दोनों पक्षों (मजदूरों और मकान मालिक) के आधिकारिक बयान दर्ज किए जा रहे हैं। चूंकि एक अन्य जगह से भी स्टील के डिब्बे में सिक्के बरामद हुए हैं, इसलिए पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या खजाने का कोई बड़ा हिस्सा कहीं और छुपाकर तो नहीं रख दिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और सच सामने आने पर संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
