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दमोह कलेक्टर की जनसुनवाई में उमड़ी भीड़: बिजली कंपनी की मनमानी पर भड़के कलेक्टर; अधिकारियों को सामने बैठाकर किया समाधान

Damoh Collector Pratap Narayan Yadav listening to public grievances during Jansunwai at Collectorate office

दमोह। दमोह जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में भारी गहमागहमी देखने को मिली। जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे आवेदकों की भीड़ के बीच कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल लोगों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की।

बिजली विभाग की मनमानी पर भड़के कलेक्टर

जनसुनवाई के दौरान शहरी क्षेत्र की महिलाओं ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। महिलाओं का कहना था कि विभाग के कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के घरों के तार काटकर ले जा रहे हैं। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को ऐसे बिल थमाए जा रहे हैं जिनका मीटर रीडिंग से कोई लेना-देना नहीं है।

कलेक्टर ने इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन घरों के तार जब्त किए गए हैं, उन्हें तत्काल वापस किया जाए। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि भविष्य में बिना मीटर लगाए अनुमानित बिल जारी करने की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

9 महीने से रुके वेतन पर तत्काल एक्शन

जनजातीय कार्य विभाग के कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उन्हें पिछले 9 महीनों से वेतन नहीं मिला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल भोपाल स्थित जनजातीय विभाग के कमिश्नर तरुण राठी से फोन पर चर्चा की।

कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद कमिश्नर ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी बाधाओं को दूर कर आगामी एक से दो दिनों के भीतर सभी लंबित वेतन की राशि कर्मचारियों के खातों में जारी कर दी जाएगी। इस त्वरित कार्रवाई से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर किया समाधान

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जनसुनवाई के दौरान एक नई पहल करते हुए आवेदकों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर संवाद कराया। इससे शिकायतों की वास्तविकता और विभागीय ढिलाई तुरंत सामने आ गई।

उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जनसुनवाई में सभी विभागों के प्रमुखों की उपस्थिति अनिवार्य है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे शिकायतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनें ताकि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।