दमोह का 80 लाख का 'भारत माता पार्क' बना नशेड़ियों का अड्डा, भारतीय जनशक्ति संघ ने दी प्रशासन को उग्र आंदोलन की चेतावनी
दमोह। शहर के बीचों-बीच कलेक्टर बंगले के ठीक सामने स्थित रानी दमयंती वार्ड क्रमांक 36 का 'भारत माता पार्क' आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लगभग 80 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर बनाए गए इस पार्क का निर्माण तो भव्य किया गया, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी और उदासीनता के कारण यह पार्क वर्तमान में अव्यवस्था, अवैध अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों का केंद्र बनकर रह गया है।
अंधेरे में डूबता पार्क, गायब हैं कुर्सियां और लाइटें
स्थानीय नागरिकों और भारतीय जनशक्ति संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पार्क की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि शाम होते ही यहां सन्नाटा और अंधेरा पसर जाता है। रखरखाव के लिए जिम्मेदार प्रशासन ने आज दिनांक तक यहां एक भी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की है। सुरक्षा के अभाव में पार्क में लगी लाइटें तोड़ दी गई हैं, बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियां गायब हो चुकी हैं और पार्क परिसर असामाजिक तत्वों व नशेड़ियों का अड्डा बन गया है।
भारतीय जनशक्ति संघ के 150 वृक्ष भी हुए नष्ट
'मिशन संकल्प अभियान' के तहत भारतीय जनशक्ति संघ द्वारा बड़े जतन से पार्क परिसर में 150 से अधिक छायादार व फलदार वृक्ष लगाए गए थे। लेकिन, देखरेख के अभाव में ये पौधे न केवल सूख रहे हैं, बल्कि खुले में छोड़ी जा रही आवारा गायों और लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण के कारण पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए इस प्रयास पर प्रशासन की लापरवाही ने पानी फेर दिया है।
प्रशासन को चेतावनी: नहीं सुधरे हालात तो होगा बड़ा जनआंदोलन
पार्क की इस गंभीर बदहाली को लेकर संगठन प्रमुख आशुतोष उपम्मन, रितेश सेन, सचिन साहू, विजय रजक सहित भारतीय जनशक्ति संघ के तमाम कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। रानी दमयंती वार्ड 36 के समस्त निवासी भी इस दुर्दशा से बेहद परेशान हैं।
संगठन ने जिला प्रशासन को एक स्पष्ट चेतावनी देते हुए मांग की है कि:
- पार्क में तत्काल सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की जाए।
- पार्क परिसर से अवैध अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए।
- लाइट व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए।
भारतीय जनशक्ति संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन ने समय रहते भारत माता पार्क की सुरक्षा और सौंदर्यीकरण सुनिश्चित नहीं किया, तो मजबूरन संगठन को वार्डवासियों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करना पड़ेगा।
