दमोह कलेक्टर का जिला अस्पताल में 'मॉर्निंग सरप्राइज': गायब डॉक्टरों पर भड़के, 5 महीने से रुके वेतन पर स्वास्थ्य कमिश्नर को लगाया फोन
दमोह। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव आज सुबह 9:30 बजे औचक रूप से जिला अस्पताल पहुँचे। बिना किसी पूर्व सूचना के पहुँचे कलेक्टर ने ओपीडी सहित विभिन्न वार्डों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि पिछली बार के मुकाबले व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में कड़ी मेहनत की आवश्यकता है।
समय पर न मिलने वाले डॉक्टरों को चेतावनी
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान पाया कि सुबह 9:45 बजे तक कुछ चेंबर में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इस पर उन्होंने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए निर्देश दिए कि सभी डॉक्टर और कर्मचारी समय पर उपस्थित रहकर मरीजों का इलाज सुनिश्चित करें। सिविल सर्जन ने सफाई देते हुए बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक पहले राउंड पर जाते हैं, उसके बाद ओपीडी में आते हैं। कलेक्टर ने 'सार्थक ऐप' के माध्यम से उपस्थिति की समीक्षा करने और अनुपस्थित रहने वालों के वेतन काटने के निर्देश दिए।
पी.एम. रिपोर्ट और सोनोग्राफी के लिए भटकना होगा बंद
निरीक्षण के दौरान दमोह निवासी एक बुजुर्ग ने कलेक्टर से शिकायत की कि उन्हें पी.एम. (Post Mortem) रिपोर्ट के लिए काफी दिनों से परेशान किया जा रहा है। कलेक्टर ने तत्काल एडिशनल एसपी को फोन लगाकर निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे पूरे जिले में किसी भी व्यक्ति को पी.एम. रिपोर्ट के लिए भटकना न पड़े और वह समय-सीमा में मिले। वहीं, सोनोग्राफी की समस्या सामने आने पर उन्होंने सिविल सर्जन को तुरंत विज्ञप्ति जारी कर एक नए डॉक्टर की व्यवस्था करने को कहा।
5 महीने से रुका है स्टाफ का वेतन
कलेक्टर को जानकारी मिली कि अस्पताल के सुरक्षा गार्डों को पिछले 5 महीनों से और सफाई व लॉन्ड्री स्टाफ को 6 महीनों से वेतन/बजट नहीं मिला है। कलेक्टर ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए मौके से ही स्वास्थ्य कमिश्नर से चर्चा की और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जब स्टाफ को वेतन नहीं मिलेगा तो सेवाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
मरीजों की सुविधा के लिए सख्त निर्देश
कलेक्टर ने जब एक मरीज को परिजन की गोद में जाते देखा तो नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल के गेट पर हमेशा व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल तैयार रहनी चाहिए। इसके साथ ही अस्पताल में हर महीने 600-700 डिलीवरी होने के कारण बेड की कमी रहती है, जिसके लिए उन्होंने बताया कि बेड की संख्या बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। परिजनों द्वारा स्टाफ के गलत व्यवहार की शिकायत पर कलेक्टर ने सिविल सर्जन से कहा कि मरीजों के साथ अभद्रता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख निर्देश और एक्शन
कलेक्टर ने डॉक्टरों को सुबह 9:00 बजे उपस्थिति अनिवार्य करने और लापरवाही पर वेतन काटने की चेतावनी दी है। एडिशनल एसपी को पी.एम. रिपोर्ट के लिए सुगम व्यवस्था बनाने और अस्पताल की सुरक्षा सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सोनोग्राफी के लिए नए डॉक्टर की नियुक्ति हेतु तत्काल विज्ञप्ति जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने कलेक्टर से कहा, "साहब, अब अस्पताल की व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है, बस आप इसी तरह अचानक आते रहा करें ताकि स्टाफ मुस्तैद रहे।" कलेक्टर ने स्वयं अस्पताल के प्रसाधन (Toilets) का भी निरीक्षण किया और सफाई व्यवस्था को उच्च स्तर पर बनाए रखने के निर्देश दिए।

