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दमोह-पथरिया मार्ग पर भारी बवाल, पानी की बूंद-बूंद को तरसे लोग, 5 घंटे किया चक्काजाम

Angry village women holding empty water containers blocking the Damoh Patharia road in protest against water scarcity

दमोह। भीषण गर्मी के बीच दमोह जिले में जल संकट (Water Crisis) ने उग्र रूप धारण करना शुरू कर दिया है। दमोह शहर से बिल्कुल सटे ग्राम इमलाई में पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज हो चुके ग्रामीणों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। पानी की भयंकर किल्लत से तंग आकर ग्रामीणों ने दमोह-पथरिया मुख्य मार्ग पर टेंट लगाकर और खाली बर्तन अड़ाकर चक्काजाम कर दिया।

यह उग्र प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शुरू होकर दोपहर 3 बजे तक यानी पूरे 5 घंटे चला। इस दौरान सड़क के दोनों ओर करीब 2 किलोमीटर तक ट्रकों, बसों और अन्य चार पहिया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे चिलचिलाती धूप में राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

खाली कुप्पे और बर्तन लेकर सड़क पर बैठीं महिलाएं, कलेक्टर को बुलाने की जिद

प्रदर्शन के दौरान इमलाई गांव की बड़ी संख्या में महिलाएं खाली कुप्पे, बाल्टियां और बर्तन लेकर सड़क के बीचों-बीच बैठ गईं और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए सड़क पर ही एक पानी का टैंकर तिरछा खड़ा कर दिया और तंबू तानकर धरने पर बैठ गए।

सूचना मिलते ही सागर नाका चौकी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित ग्रामीण सीधे कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सभी कुएं और तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं, हैंडपंप हफ्तों से खराब पड़े हैं और प्रशासन सुध नहीं ले रहा है।

"नगर पालिका टैक्स ले रही है, पर सुविधाएं गांव जैसी भी नहीं"

प्रदर्शनकारियों ने नगर पालिका परिषद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इमलाई गांव को शहर से सटा होने के कारण नगर पालिका सीमा क्षेत्र में तो शामिल कर लिया गया है, लेकिन यहां सुविधाएं ग्रामीण अंचलों से भी बदतर हैं। नगर पालिका हमसे हर प्रकार का टैक्स और शुल्क वसूल रही है, लेकिन पानी, बिजली और पक्की सड़क जैसी बुनियादी जरूरतें मुहैया नहीं कराई जा रही हैं।

इमलाई वासियों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि गांव में जो पानी की टंकी बनी है, उसमें सप्लाई का प्रेशर इतना कम है कि पानी भरने के लिए जमीन पर तसला (बर्तन) लगाना पड़ता है। सप्लाई भी दिन भर में बमुश्किल 10 मिनट के लिए खुलती है, जिसमें एक परिवार 4 कुप्पे पानी भी नहीं भर पाता।

तहसीलदार और सीएमओ के लिखित आश्वासन के बाद खुला जाम

घंटों चले हंगामे और सड़क पर वाहनों की लंबी कतारों को देखते हुए आखिरकार नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह और तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा की और जमीनी हकीकत को स्वीकार किया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि जब तक पानी की समस्या का स्थायी निराकरण नहीं हो जाता, तब तक नगर पालिका द्वारा इमलाई गांव में प्रतिदिन 10 टैंकर पानी अनिवार्य रूप से भेजा जाएगा। इस ठोस आश्वासन और लिखित पत्र के मिलने के बाद दोपहर 3 बजे ग्रामीणों ने सड़क से टेंट हटाया और जाम खोला, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका। हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि टैंकर समय पर नहीं पहुंचे, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।