दमोह में जल संकट: कलेक्टर ने संभाली कमान, वाटर सप्लाई सिस्टम सुधारने के लिए बनाई 'टू-वे' रणनीति
दमोह। भीषण गर्मी के तीखे तेवरों के बीच दमोह शहर में पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। नगर पालिका का वाटर सप्लाई सिस्टम पूरी तरह चरमराने के कारण शहर अघोषित जल संकट के दौर से गुजर रहा है। जनता की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए अब जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कलेक्टर ने खुद मोर्चा संभालते हुए नगर पालिका के अधिकारियों और पार्षदों के साथ आपात बैठक कर समाधान की रूपरेखा तैयार की है।
कुप्रबंधन पर कलेक्टर सख्त: 'असली पाठशाला' में समाधान की तलाश
शहर के विभिन्न वार्डों में पानी की किल्लत और वितरण व्यवस्था में भारी कुप्रबंधन (Mismanagement) की शिकायतों के बाद जिला कलेक्ट्रेट में अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
- वार्डवार समीक्षा: बैठक के दौरान प्रत्येक वार्ड के पार्षदों ने अपने क्षेत्र की विशिष्ट समस्याओं को कलेक्टर के समक्ष रखा।
- अधिकारियों को निर्देश: कलेक्टर ने नगर पालिका के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पानी के वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संकट से निपटने के लिए दो स्तरीय समाधान
बैठक में विचार-विमर्श के बाद कलेक्टर ने जल संकट से निपटने के लिए दो तरह की योजनाओं पर मुहर लगाई है:
- तात्कालिक समाधान (Immediate Plan): पेयजल की वर्तमान किल्लत को देखते हुए उन क्षेत्रों में टैंकरों की संख्या बढ़ाने और सप्लाई के समय में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है जहाँ पाइपलाइन से पानी नहीं पहुँच पा रहा है।
- दीर्घकालीन समाधान (Long-term Plan): शहर के वाटर सप्लाई नेटवर्क में तकनीकी सुधार, नई पाइपलाइन बिछाने और जल स्रोतों के बेहतर प्रबंधन पर काम शुरू किया जाएगा ताकि आने वाले समय में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
दो दिनों में दिखेगा जमीन पर असर
कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि इन दोनों रणनीतियों पर अगले 48 घंटों (दो दिनों) के भीतर अमल शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड पर उतरकर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि हर घर तक जरूरत के अनुसार पानी पहुँच रहा है।