एमपी में UCC की तैयारी तेज: दमोह में जन-परामर्श बैठक; नागरिकों से लिखित और ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित
दमोह – मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी कवायद को काफी तेज कर दिया है. इसी सिलसिले में प्रदेश में यूसीसी के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा विभिन्न जिलों में जाकर जन-परामर्श किया जा रहा है. मंगलवार को दमोह जिला मुख्यालय स्थित पी.एम श्री कॉलेज के सभागार में अपराह्न 3:30 बजे से एक महत्वपूर्ण जन-परामर्श बैठक का आयोजन किया गया. इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता समिति के सदस्य एवं प्रख्यात कानूनविद् श्री अनूप नायर ने की, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने विचार साझा किए.
संविधान के अनुच्छेद 44 और डॉ. आंबेडकर के विचारों का दिया हवाला
बैठक को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए समिति के सदस्य श्री अनूप नायर ने देश के वर्तमान विधिक ढांचे पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत के भीतर विवाह, विवाह विच्छेद (तलाक), भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं दत्तक ग्रहण (बच्चा गोद लेना) जैसे बेहद संवेदनशील सामाजिक विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत (पर्सनल) कानून लागू हैं. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि देश के संविधान निर्माण के समय कंस्टीट्यूएंट असेंबली (संविधान सभा) में भी समान नागरिक संहिता का मुद्दा बेहद प्रमुखता से उठा था. उस समय संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं के.एम. मुंशी इसके पूर्ण पक्ष में थे, लेकिन कुछ अन्य सदस्यों की असहमति के कारण इसे उस वक्त तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया जा सका. इसी वजह से दूरगामी सोच के साथ इसे संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में शामिल किया गया था.
धार्मिक कानूनों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं महिलाएं और बच्चे
कानूनविद् श्री नायर ने वर्तमान विसंगतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ के चलते समाज में सबसे ज्यादा प्रताड़ना और विसंगतियों का सामना महिलाओं और मासूम बच्चों को करना पड़ता है. हालांकि समय-समय पर देश में कई विधिक और कानूनी सुधार हुए हैं, लेकिन अब एक वैज्ञानिक और तार्किक आधार पर कानून बनाने की महती आवश्यकता है. उन्होंने आगे बताया कि देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी कई मौकों पर केंद्र और राज्य सरकारों को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस प्रयास करने की सलाह दी है. इसी विधिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने यह व्यापक जन-परामर्श प्रक्रिया शुरू की है, ताकि समाज के हर वर्ग की राय लेकर विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण के साथ-साथ लिव-इन रिलेशनशिप जैसे आधुनिक विषयों पर समान अधिकार आधारित कानून बनाने की संभावनाओं को परखा जा सके.
लिखित और ऑनलाइन मांगे सुझाव, इन गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
समिति सदस्य ने दमोह के नागरिकों से अपील की कि वे इस विषय पर बिना किसी संकोच के अपने सुझाव खुलकर सामने रखें. उन्होंने बताया कि इच्छुक नागरिक अपने सुझाव मौखिक या लिखित रूप में दे सकते हैं, इसके अलावा सरकार द्वारा जारी आधिकारिक वेबसाइट ucc.mp.gov.in के माध्यम से भी ऑनलाइन सुझाव दर्ज कराए जा सकते हैं. प्राप्त सभी सुझावों का बारीकी से संकलन और विचार-विमर्श करने के बाद समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपेगी.
इस महत्वपूर्ण जन-परामर्श अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसुरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मंजू धर्मेंद्र कटारे, जनपद अध्यक्ष प्रीति कमल ठाकुर, भाव सिंह लोधी मासाब, बार काउंसिल व बाल संरक्षण समिति के सदस्य, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रही.
एमपी यूसीसी के लिए पूरी तरह अनुकूल राज्य: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राज्य सरकार का रुख पूरी तरह से साफ कर दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की तैयारियां बहुत तेजी से चल रही हैं. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में अलग-अलग विधिक विद्वानों को मिलाकर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन पहले ही किया जा चुका है. सीएम ने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक दौर में वैधानिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से भिन्न-भिन्न मतों और कानूनों की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि देश और राज्य को अब यूसीसी की ओर बढ़ने की जरूरत है.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में देश के तीन राज्यों- उत्तराखंड, गुजरात और असम ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं और मध्य प्रदेश भी जल्द ही इसे अपने राज्य में पूर्ण रूप से लागू करेगा. उन्होंने मध्य प्रदेश को यूसीसी के लिए सबसे अनुकूल राज्यों में से एक बताते हुए जनता से अपील की है कि वे सरकार द्वारा लॉन्च की गई वेबसाइट पर जाकर अपने बहुमूल्य सुझाव और राय जरूर साझा करें, ताकि एक सर्वसमावेशी कानून का निर्माण किया जा सके.
