दमोह में जनजातीय अंचलों के विकास का महाअभियान: 25 मई तक आयोजित होगा "जन भागीदारी सप्ताह", ग्राम-ग्राम पहुंचकर शिविरों में समस्याओं का होगा त्वरित समाधान
दमोह। दमोह जिले के जनजातीय अंचलों में रहने वाले नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण को नई गति देने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। शासन की महत्वपूर्ण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से दमोह जिले में 18 मई से 25 मई 2026 तक "जन भागीदारी सप्ताह" का व्यापक और विशेष अभियान शुरू किया गया है।
इस महाअभियान के तहत जिले का प्रशासनिक अमला स्वयं ग्राम-ग्राम पहुंचेगा और विशेष शिविरों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों को न केवल योजनाओं से जोड़ेगा, बल्कि उनकी समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान भी सुनिश्चित करेगा।
पीएम जनमन और चिन्हित जनजातीय ग्रामों पर विशेष फोकस
यह विशेष अभियान मुख्य रूप से दमोह जिले के अंतर्गत आने वाले 'पीएम जनमन योजना' (PM JANMAN) के गांवों और अन्य विशेष रूप से चिन्हित जनजातीय बाहुल्य ग्रामों में संचालित किया जाएगा। अभियान के दौरान सुदूर अंचलों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को शासन की बुनियादी सुविधाओं जैसे पक्के आवास, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ सीधे विभिन्न पेंशन व स्वरोजगार योजनाओं से सैचुरेट (पूर्ण आच्छादित) करने का लक्ष्य रखा गया है।
कलेक्टर प्रताप नारायण ने दिए सख्त निर्देश, सभी विभाग करेंगे मुस्तैदी से काम
"जन भागीदारी सप्ताह" महाअभियान को पूरी तरह सफल और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए दमोह जिला कलेक्टर प्रताप नारायण ने प्रशासनिक एवं मैदानी अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों के जिला प्रमुखों और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि शासन की मंशानुसार इस अभियान के अंतर्गत पूरी संवेदनशीलता के साथ जमीनी स्तर पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि शिविरों के आयोजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, राजस्व, आदिम जाति कल्याण और कृषि जैसे सभी प्रमुख विभागों के मैदानी अमले को अनिवार्य रूप से इन चिन्हित ग्रामों में उपस्थित रहकर पात्र हितग्राहियों के फॉर्म भरवाने और उन्हें तत्काल लाभान्वित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि इस अभियान का वास्तविक लाभ सही मायनों में जनजातीय परिवारों तक पहुंच सके।
