150 साल बाद कान्हा की धरती पर लौटे जंगली भैंसे, CM मोहन यादव ने किया रिलीज
कान्हा टाइगर रिजर्व। मध्यप्रदेश के वन्यजीव इतिहास और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के लिए 28 अप्रैल 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। लगभग डेढ़ शताब्दी के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश के जंगलों में एक बार फिर 'जंगली भैंसों' की दहाड़ सुनाई देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को बालाघाट जिले के सूपखार-टोपला क्षेत्र में असम से लाए गए चार जंगली भैंसों को बाड़े में रिलीज किया।
असम से आए नए मेहमान: 150 साल का सूखा खत्म
मध्यप्रदेश सरकार इन दुर्लभ वन्य प्राणियों को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लेकर आई है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह मध्यप्रदेश के पर्यावरण के लिए एक अद्भुत अवसर है। 150 साल पहले ये जीव मध्यप्रदेश के जंगलों से विलुप्त हो गए थे, जिनकी अब ससम्मान वापसी हुई है।
मुख्यमंत्री ने इस सौगात के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात में जंगली भैंसा और गैंडा लाने पर चर्चा हुई थी, जिसका पहला चरण आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
खास बातें और भविष्य की योजनाएं
संरचना: कान्हा पहुंचे इन मेहमानों में एक नर और तीन मादा जंगली भैंसे शामिल हैं। ये सभी अपनी किशोरावस्था में हैं, जिससे उनके स्वस्थ रहने और वंश वृद्धि की अधिक संभावनाएं हैं।
इको-सिस्टम की मजबूती: जंगली भैंसों के आने से कान्हा का पारिस्थितिक तंत्र और अधिक संतुलित होगा।
पर्यटन और रोजगार: सीएम ने उम्मीद जताई कि इन नए वन्य प्राणियों के आने से प्रदेश में वाइल्डलाइफ टूरिज्म बढ़ेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश का दबदबा
मुख्यमंत्री ने गर्व से दोहराया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में चीता स्टेट और लेपर्ड स्टेट के साथ-साथ वल्चर (गिद्ध) स्टेट भी बन चुका है। इसके अलावा प्रदेश में घड़ियाल, भेड़िया और मगरमच्छों की भी पर्याप्त संख्या है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए चीता प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह श्योपुर के कूनो और गांधी सागर में चीते फल-फूल रहे हैं, उसी तरह अब नोरादेही अभ्यारण्य को भी चीतों के स्वागत के लिए तैयार किया जा रहा है।