The material on this site may not be reproduced, distributed, transmitted, cached or otherwise used, except with the prior written permission of digital. Copyright © 2021 Damoh Today

Advertisement

दमोह जिले का यह ग्राम बन रहा है आत्म निर्भर यहां की महिलाए बना रहीं हैं गोबर के दीये

 

damoh collector diwali

दमोह। आज के समय में महिलाएं भी परिवार के साथ के साथ कंधे से कांधा मिलाकर तरक्की की राह में हाथ बंटा रही है। ऐसा ही जिला मुख्यालय के समीप ग्राम तिदोंनी और बांदकपुर सहित अन्य गांवों की महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर तरक्की की राह पकड़ ली है। इन महिलाओं से बात करने पर इनके हौसले कितने बुलंद है, इसी से समझा जा सकता है।


तिदौनी गांव की रहने वाली हरी बाई रैकवार ने बताया कि वह जय श्री कृष्णा समूह की सदस्य हैं, गोबर के कंडे सुखा कर उनको कूटती हूँ फिर चालकर उसमें पाउडर और गोंद में मिलाकर मिक्स करते हैं, फिर मशीन से दीये (दीपक) बनाती हूँ। हम सारे समूह की महिलाएं दिया बनाते हैं। उन्होंने कहा अभी तो हम बेच रहे हैं, बेचने के बाद फायदा होगा। अभी तो बहुत बिक्री हो रही है, लोग खरीदने आ रहे हैं, इस काम के पहले हम स्कूलों की ड्रेस बनाते थे, फिर इसके बाद हम लोगों के पास दीयो का काम आया दीये बनाये, इसके बाद अगरबत्ती-धूपबत्ती उसके बाद फिर ड्रेस बनायेंगे।

damoh collector diwali

 मेरी सभी महिलाओं से विनती है हम सब आगे बढ़े, अपने परिवार को बढाये, आगे बढने की सोच रखें, तभी हम उन्नति कर पाएंगे, कभी पीछे मत हटना, बस काम करते चलो, आगे बढ़ो, तो बढ़ते जाएंगे, मेरी यही सब बहनों से उम्मीद है, इसके साथ ही आगे चलकर हम घर बैठे दूसरा काम भी कर सकते हैं, खुद से करो, कुछ सिखाओ, स्वाबलंबी बनोगी, आप करेंगी तो आपके साथ एक बहन और करेगी, फिर दूसरी बहन भी करेगी, तभी गरीबी हट जाएगी।


वहीं कलेक्टर तरुण राठी का कहना है इस अभिनव पहल के तहत दमोह के स्व सहायता समूह द्वारा मिट्टी के दीये परंपरागत ढंग से बनाये हैं, उनके साथ-साथ गोबर के दीये (दीपक) भी बनाये जा रहा है। हम स्वदेशी दीपावली मनाएं, उसी की दिशा में यह एक प्रयास है, मेरा लोगों से यही अनुरोध है कि स्व सहायता समूह की महिलाये जो इस गतिविधि से जुड़ी हैं, उनको प्रोत्साहित करें।

damoh collector diwali

इसके संबंध में हमने एक स्टॉल कलेक्ट्रेट के बाहर लगाया हुआ है, लोग गोबर के दीये खरीद कर इन महिलाओं को प्रोत्साहित करें, इससे हम स्वदेशी दीपावली के साथ-साथ हम एक इको फ्रेंडली तरीके से दीपावली को मनाएंगे।


राठी ने बताया इसके साथ ही एक अन्य आदेश जारी किया गया है, जो भी मिट्टी के दीये बेचने या गोबर के बने दीये बेचने गांव से या कहीं से भी लोग शहरों में आते हैं, उनसे किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।